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August 30, 2025 8:06 pm

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કેતન પટેલ પ્રમુખ ए ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસપ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિ, દમણ અને દીવ દ્વારા ૨૫/૦૮/૨૦૨૫ ના રોજ પ્રફુલભાઈ પટેલને પત્ર લખ્યો છે દમણ જિલ્લાને મહાનગર પાલિકામાં અપગ્રેડ કરવાનો પ્રસ્તાવ

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!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 68 !!-उद्धव की वृन्दावन यात्रा भाग 2 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 68 !!-उद्धव की वृन्दावन यात्रा भाग 2 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 68 !!

उद्धव की वृन्दावन यात्रा
भाग 2

कितना सुन्दर है ये वन ……..कितना प्रेमपूर्ण है ये वन ……….

उद्धव विचार करते हैं – स्वागत समुत्सुका – वृन्दावन ।

हाँ यही लगता है इन वन को देखते हुए…… तभी तो कृष्ण इस वन के लिये इतनें व्याकुल थे…….

उद्धव का रथ बढ़ता जा रहा है –

पर वृक्ष की लताएँ एकाएक झुक रही हैं……..आश्चर्य !

उद्धव का रथ रुक जाता है……लताओं को हटाते हैं……..पर वृक्षों में बैठे पक्षी भी उड़ उड़ कर उद्धव के रथ की परिक्रमा लगा रहे हैं ।

पर अब ये क्या ! उद्धव के वस्त्रों से वृक्ष के काँटे उलझ रहे थे ।

उद्धव को ऐसा लग रहा था जैसे ………..ये सब पूछ रहे हों गोपाल कहाँ है ? गोविन्द कहाँ है ? हमारा कन्हाई कहाँ है ?

“नही आया तुम्हारा कन्हाई” – उद्धव को कहना पड़ा ।

ओह ! उद्धव की आँखें फटी की फटी रह गयीं …………

एकाएक परिवर्तन आगया था वृन्दावन में…..”कृष्ण नही आये”

ये अनुभूति स्वयं जाग रही थी यहाँ के वातावरण में ………..

तब बिलकुल समय नही लगा ……और जो वृन्दावन इतना सुन्दर था ……स्वर्ग के नन्दन वन को भी मात दे रहा था …….वो मरुस्थल बन गया था ……वृक्ष ठूँठ बनकर खड़े थे…….करील, खैर, बबूल शमी ….यही कँटीली झाड़ियाँ ही अब दीख रही थीं …………

उद्धव चकित होगये थे ……..एकाएक दावग्नि की तरह वृन्दावन जल गया था ………..पक्षी पशु मानों कंकाल मात्र रह गए थे …………

उद्धव कुछ समझ नही पा रहे कि – क्या ये वृन्दावन चैतन्य है ?

रथ देखते ही दौड़ पडीं थीं गायें ………कितनी सुन्दर …कितनी बलिष्ठ ……दौड़ी आईँ थीं रथ के पास………..

रथ की परिक्रमा लगाई थी उन गायों नें …………

क्रमशः …
शेष चरित्र कल ……..

उद्धव की वृन्दावन यात्रा
भाग 2

कितना सुन्दर है ये वन ……..कितना प्रेमपूर्ण है ये वन ……….

उद्धव विचार करते हैं – स्वागत समुत्सुका – वृन्दावन ।

हाँ यही लगता है इन वन को देखते हुए…… तभी तो कृष्ण इस वन के लिये इतनें व्याकुल थे…….

उद्धव का रथ बढ़ता जा रहा है –

पर वृक्ष की लताएँ एकाएक झुक रही हैं……..आश्चर्य !

उद्धव का रथ रुक जाता है……लताओं को हटाते हैं……..पर वृक्षों में बैठे पक्षी भी उड़ उड़ कर उद्धव के रथ की परिक्रमा लगा रहे हैं ।

पर अब ये क्या ! उद्धव के वस्त्रों से वृक्ष के काँटे उलझ रहे थे ।

उद्धव को ऐसा लग रहा था जैसे ………..ये सब पूछ रहे हों गोपाल कहाँ है ? गोविन्द कहाँ है ? हमारा कन्हाई कहाँ है ?

“नही आया तुम्हारा कन्हाई” – उद्धव को कहना पड़ा ।

ओह ! उद्धव की आँखें फटी की फटी रह गयीं …………

एकाएक परिवर्तन आगया था वृन्दावन में…..”कृष्ण नही आये”

ये अनुभूति स्वयं जाग रही थी यहाँ के वातावरण में ………..

तब बिलकुल समय नही लगा ……और जो वृन्दावन इतना सुन्दर था ……स्वर्ग के नन्दन वन को भी मात दे रहा था …….वो मरुस्थल बन गया था ……वृक्ष ठूँठ बनकर खड़े थे…….करील, खैर, बबूल शमी ….यही कँटीली झाड़ियाँ ही अब दीख रही थीं …………

उद्धव चकित होगये थे ……..एकाएक दावग्नि की तरह वृन्दावन जल गया था ………..पक्षी पशु मानों कंकाल मात्र रह गए थे …………

उद्धव कुछ समझ नही पा रहे कि – क्या ये वृन्दावन चैतन्य है ?

रथ देखते ही दौड़ पडीं थीं गायें ………कितनी सुन्दर …कितनी बलिष्ठ ……दौड़ी आईँ थीं रथ के पास………..

रथ की परिक्रमा लगाई थी उन गायों नें …………

क्रमशः …
शेष चरित्र कल ……..

उद्धव की वृन्दावन यात्रा
भाग 2

कितना सुन्दर है ये वन ……..कितना प्रेमपूर्ण है ये वन ……….

उद्धव विचार करते हैं – स्वागत समुत्सुका – वृन्दावन ।

हाँ यही लगता है इन वन को देखते हुए…… तभी तो कृष्ण इस वन के लिये इतनें व्याकुल थे…….

उद्धव का रथ बढ़ता जा रहा है –

पर वृक्ष की लताएँ एकाएक झुक रही हैं……..आश्चर्य !

उद्धव का रथ रुक जाता है……लताओं को हटाते हैं……..पर वृक्षों में बैठे पक्षी भी उड़ उड़ कर उद्धव के रथ की परिक्रमा लगा रहे हैं ।

पर अब ये क्या ! उद्धव के वस्त्रों से वृक्ष के काँटे उलझ रहे थे ।

उद्धव को ऐसा लग रहा था जैसे ………..ये सब पूछ रहे हों गोपाल कहाँ है ? गोविन्द कहाँ है ? हमारा कन्हाई कहाँ है ?

“नही आया तुम्हारा कन्हाई” – उद्धव को कहना पड़ा ।

ओह ! उद्धव की आँखें फटी की फटी रह गयीं …………

एकाएक परिवर्तन आगया था वृन्दावन में…..”कृष्ण नही आये”

ये अनुभूति स्वयं जाग रही थी यहाँ के वातावरण में ………..

तब बिलकुल समय नही लगा ……और जो वृन्दावन इतना सुन्दर था ……स्वर्ग के नन्दन वन को भी मात दे रहा था …….वो मरुस्थल बन गया था ……वृक्ष ठूँठ बनकर खड़े थे…….करील, खैर, बबूल शमी ….यही कँटीली झाड़ियाँ ही अब दीख रही थीं …………

उद्धव चकित होगये थे ……..एकाएक दावग्नि की तरह वृन्दावन जल गया था ………..पक्षी पशु मानों कंकाल मात्र रह गए थे …………

उद्धव कुछ समझ नही पा रहे कि – क्या ये वृन्दावन चैतन्य है ?

रथ देखते ही दौड़ पडीं थीं गायें ………कितनी सुन्दर …कितनी बलिष्ठ ……दौड़ी आईँ थीं रथ के पास………..

रथ की परिक्रमा लगाई थी उन गायों नें …………

क्रमशः …
शेष चरित्र कल ……..

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