*।।आज की बात।।
जिस दिल में तू नहीं वो जान अधूरी हैं,
तू दिल में समा जाये तो जिन्दगी पूरी है l
पालनहार प्रभु कृष्ण के हम बन्दे हैं, हमें उसी ने ही बनाया हैं । यानी हम उसी की शाख के फूल हैं और हम में उसी प्रभु का अंश निहित हैं l इसीलिए जगत के कल्याण हेतु कार्य करो तो प्रभु कृष्ण आपका कल्याण स्वयं कर देंगे ।
यदि किसी गिरे को उठाओगे तो कृष्ण आपको गिरने नहीं देंगे l
रोते को हँसाओगे तो कृष्ण आपको रोने नहीं देंगे l
चिंतित की चिंता दूर करोगे तो कृष्ण आपको निश्चिंत कर देंगे l
किसी की पीड़ा को दूर करोगे तो कृष्ण आपको दुख दर्द से मुक्त रखेंगे l
दूसरे की सफलता में सहायक बनो तो कृष्ण आपको कभी असफल नहीं होने देंगे l
आप दान तो ज़रूर करो लेकिन दान ऐसा हो कि जिससे दूसरे का मंगल-ही-मंगल हो। क्योंकि जितना आप मंगल की भावना से दान करते हो उतना ही दान लेने वाले का भला होता है, साथ में आपका भी इहलोक और परलोक सुधर जाता है।
दान श्रद्धा, प्रेम, सहानुभूति एवं नम्रतापूर्वक दो, कुढ़कर, जलकर, खीजकर मत दो। अहं सजाने की गलती नहीं करो, अहं को विसर्जित करके विशेष नम्रता से दो और सामने वाले के अंतरात्मा का आशीष पाओ l इसीलिए दान करते समय यह भावना नहीं होनी चाहिए कि लोग मेरी प्रशंसा करें, वाहवाही करें। दान इतना गुप्त हो कि देते समय आपके दूसरे हाथ को भी पता न चले।
जो लोग नित्य अच्छे कर्म नहीं करते, और सोचते हैं कि कोई बड़ा अवसर आने पर महान कार्य करेंगे। उनको अवसर आने पर कुछ सूझता ही नहीं। और वह चाह कर भी दान पुण्य करने से वंचित हो जाते हैं। क्योंकि अच्छे कर्म करने का स्वभाव, दान-धर्म उसी को समय पर याद आता है जो छोटे-छोटे अवसरों पर भी त्याग तथा उपकार करने का स्वभाव बना लेता है, और वही महान कार्य करने में भी सफल हो जाते हैं। इसीलिए हमे अपने जीवन मे परोपकार, उदारता, त्याग तथा अच्छे कर्म करने का स्वभाव बना लेना चाहिये। हमे छोटी छोटी चीजों को दान कर, त्यागने का अभ्यास करना चाहिए। क्योंकि जो हमारा है ही नही उससे हम मोह क्यों बढ़ायें। सब कुछ नश्वर है, यह मानकर वस्तुओं का त्याग करते रहना चाहिये।
।।इति।।


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