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🌹 *श्रीकृष्णाश्रय* 🌹
🌹श्री कृष्णाश्रय स्तोत्रका पाठ🌹 श्रीठाकोरजी के सन्मुख ही क्यों करना चाहिये?
सभी पुस्तकोमें ऐसा लीखा हुआ आता है कि
श्रीकृष्णाश्रय का पाठ श्रीठाकोरजी के सन्मुख ही करना तो ऐसा क्युं और कीस लीये करना चाहिये वो समजे……..
लाहोर के विद्वान पंडित बुलामिश्र जब श्रीमहाप्रभुजी की शरणमें आये तब आपश्रीने उनको नामनिवेदन कराया, बादमें श्रीकृष्णाश्रय का पाठ कराया सो श्रीठाकोरजी की लीला का अनुभव होने लगा। सभी शास्त्र, पुराण, वेद के आश्रय का ज्ञान प्राप्त हो गया।
श्रीमहाप्रभुजीने कृपा करके उन्हें फलरुप मानसी सेवा का दान कीया. इसलिये हमें भी सन्मुख पाठ करने से श्रीठाकोरजी हमारे पर कृपा करेंगे ऐसा भाव होना चाहिए।
🌹कृष्णाश्रय🌹
🌷 कृष्ण का आश्रय🌷
*जो भगवान श्रीकृष्ण के समीप इस कृष्णाश्रय का पाठ करता है उस मनुष्य के श्रीकृष्ण स्वयम् आश्रय हो जाते हैं *यह वल्लभ का कहना है।
जब हम आश्रय का अनुभव करते हैं हम तदाकार हो जाते हैँ अनुभव और अनुभवकर्ता भिन्न भिन्न नही होते। अतः जो उत्तम हो उसी का
अनुभव करना चाहिये क्योंकि वही वेष्णव का स्वरूप् होता है।
यह व्यवस्था स्वयम्भगवान की बनाई हुई है।
*जो उत्तम नही है उसके *स्मरण, चिंतन से वैसा ही अनुभव होता है जो वेष्णवता की विकास यात्रा में बड़ा अवरोध है।
उत्तम यही है हम निरन्तर आश्रय का ही बल्कि परम् आश्रय का ही अनुभव करें।
🌹जय श्री कृष्ण 🌹
