केशव बटाक द्वारा ऋषि सुनक को लिखे पत्र पर यूके ने लिया संज्ञान, इंडियन हाई कमीशन की सुरक्षा बढ़ाने का दिया आश्वासन

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केशव बटाक द्वारा ऋषि सुनक को लिखे पत्र पर यूके ने लिया संज्ञान, इंडियन हाई कमीशन की सुरक्षा बढ़ाने का दिया आश्वास

  • यूके सरकार के गृह मंत्रालय से संबद्ध होम ऑफिस पुलिस पावर्स युनिट ने NRI Group London-UK के कन्वीनर केशव बटाक को जवाबी पत्र में कहा कि यूके गवर्नमेंट आपके ध्यानाकर्षण वाले मुद्दों पर है गंभीर
    लंदन। इंडियन हाई कमीशन पर खालिस्तानियों के हमले से नाराज भारतबंधु केशवभाई बटाक द्वारा पीएम ऋषि सुनक को लिखे कड़े पत्र के जवाब में यूके गृह मंत्रालय से संबद्ध होम ऑफिस ने इंडियन हाई कमीशन और स्टाफ की सुरक्षा बढ़ाने का आश्वासन दिया है। NRI Group London-UK के कन्वीनर केशव बटाक ने 21 अप्रैल को ब्रिटिश पीएम को लिखे पत्र में खालिस्तान समर्थकों द्वारा इंडियन हाईकमिशन पर हमले और तिरंगे के अपमान को भारत की संप्रभुता पर चोट करार दिया था। भारतबंधु केशव बटाक ने यूके को ‘ भारतद्रोहियों ‘ की शरणस्थली बनते जाने और ‘ भारत विरोधी तत्वों’ पर अंकुश लगाने में यूके सरकार के विफलता पर ब्रिटिश पीएम से नाराजगी जताई थी। इसके प्रत्युत्तर में ब्रिटिश होम ऑफिस ‘पुलिस पावर्स युनिट’ ने एनआरआई ग्रुप, लंदन-यूके के कन्वीनर केशव बटाक को पत्र लिख कर बताया कि ‘आपकी बातों को यूके सरकार ने गंभीरता से लिया है।’ मामले मे एक व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हुई है। आपके ध्यानाकर्षण पर इंडियन हाई कमीशन व स्टाफ की सुरक्षा व्यवस्था जरूरत मुताबिक अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाई जाएगी। यूके में मंदिरों और हिन्दुओं पर चरमपंथियों के हमले तथा यूके में खालिस्तानियों के छुट्टा घूमने से यूके के शांतिपूर्ण माहौल के बिगड़ने जैसे केशव बटाक के ध्यानाकर्षण पर होम ऑफिस लंदन ने ब्रिटिश सरकार के सतर्क होने व सर्व-सामुदायिक हितों के संरक्षण का भरोसा दिलाया है।
    बॉक्स
    यूके सरकार ‘भारतद्रोहियों’ पर लगाम लगाकर साबित करे कि उसकी ‘कथनी और करनी’ एक है : केशव बटाक
    भारतबंधु केशव बटाक ने ब्रिटिश होम ऑफिस के जवाबी पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ” यूके सरकार को यूके में पलते ‘भारतद्रोहियों’ की नकेल कस कर यह साबित करना चाहिए कि उसकी ‘कथनी और करनी’ एक है। ” ब्रिटिश सरकार कुछ भी कहे। मगर हकीकत में यूके खालिस्तानी और पाकिस्तानी मानसिकता वाले चरमपंथियों की शरणस्थली बना हुआ है। देर-सबेर यूके को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ‘कट्टरता ‘ किसी भी मुल्क के लिए हितकारी नहीं है। भारत के ‘दु:खचिंतकों’ को पनाह देने वाले देशों को ‘आज के भारत’ से सचेत रहना चाहिए। हम भारत-यूके दोनों के हितैषी हैं। इसलिए इंडो-यूके हितों की बात करते हैं। जबकि कट्टरपंथी ‘धर्म-विशेष’ के हितैषी हैं जो अपने मादरे वतन और कर्मभूमि दोनों के लिए विनाशक हैं।
    लि.
    NRI Group, London-UK
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