!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 99 !!
राधे आपुहीं श्याम भई…
भाग 2
हाँ ……है ना मेरे पास……उद्धव इधर उधर टाटोलनें लगे……कृष्ण की कौतुहलता बढ़ती ही जा रही थी ……….
उद्धव नें……….ये है श्रीराधारानी का पत्र………पढ़िये नाथ ! उद्धव नें श्रीकृष्ण के हाथों राधा का वो पत्र दिया ।
श्री कृष्ण पागलों की तरह उस पत्र को चूमते हैं …..हृदय से लगाते हैं ।
पर जैसे ही पत्र को खोलते हैं कृष्ण………….ओह !
अपनें आँसुओं को पोंछते हुए महर्षि शाण्डिल्य बोले ……..
पत्र कौन किसे लिखे वज्रनाभ ! पत्र की सार्थकता के लिये दो का होना तो आवश्यक है ना ? एक पत्र लिखनें वाला ….और दुसरा पढ़ने वाला ।
पर यहाँ तो एक ही हैं …..दो हैं कहाँ ?
पर फिर भी लिखा पत्र श्रीराधा नें……….और ऐसा पत्र लिखा जो दुनिया में आज तक न लिखा गया था ………..
श्रीराधारानी बहुत रोईं थीं उद्धव को पत्र देकर विदा किया तब ……..
ललिता सखी नें पूछा ………क्या हुआ स्वामिनी ! आप क्यों रो रही हो ?
तब दौड़ पडीं थीं उद्धव के रथ पीछे …………पर रथ तो जा चुका था ……धड़ाम से गिर गयीं ललिता नें सम्भाला , ।
ललिते ! मुझ से गलती हो गयी …
…मुझ से बहुत भारी गलती हो गयी ।
पर हुआ क्या ?
क्रमशः ….
शेष चरित्र कल –


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