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August 30, 2025 7:48 pm

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કેતન પટેલ પ્રમુખ ए ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસપ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિ, દમણ અને દીવ દ્વારા ૨૫/૦૮/૨૦૨૫ ના રોજ પ્રફુલભાઈ પટેલને પત્ર લખ્યો છે દમણ જિલ્લાને મહાનગર પાલિકામાં અપગ્રેડ કરવાનો પ્રસ્તાવ

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!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 99 !!-राधे आपुहीं श्याम भई…भाग 3 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 99 !!-राधे आपुहीं श्याम भई…भाग 3 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 99 !!

राधे आपुहीं श्याम भई…
भाग 3

तब दौड़ पडीं थीं उद्धव के रथ पीछे …………पर रथ तो जा चुका था ……धड़ाम से गिर गयीं ललिता नें सम्भाला , ।

ललिते ! मुझ से गलती हो गयी …

…मुझ से बहुत भारी गलती हो गयी ।

पर हुआ क्या ?

सखी ! मुझे क्या होता जा रहा है आज कल ….बता ना ?

जब वृन्दावन में थे मेरे श्याम सुन्दर तब प्रेम करना तो दूर ……..नजर भर देख भी नही पाई ………..कभी मानिनी बन जाती थी ……..कभी रूठ जाती थी उनसे ………वो मनाते, मैं न मानती …..वो दुःखी हो चले जाते मेरे पास से ………पर उनके जानें के बाद मैं बाबरी ……रोती तड़फती ……..मैं शुरू से ही ऐसी अभिमानिनी ही थी ……….पहले मान करना ……फिर उनकी याद करके रोना , तड़फना ………….

आज देख ना मुझ से कितनी भारी गलती हो गयी …………

पर गलती क्या हुयी स्वामिनी ! कुछ तो बताओ ?

तब श्रीराधा रानी नें कहा ।


पत्र खोला श्रीकृष्ण नें …….किन्तु जैसे ही पत्र को खोला ……….

ओह ! श्रीकृष्ण तो “हा राधे !” कहते हुए मूर्छित हो गए ।

उद्धव नें सम्भाला श्रीकृष्ण को ।

पत्र में कुछ नही लिखा था ………………हाँ कुछ अक्षर लिखे थे ……पर वो अक्षर भी आँसुओं में घुल कर बह गए थे ……..पत्र काजल की कालिमा से काला हो गया था ………….

हाँ हाँ ………बस कुछ वाक्य दिखाई दे रहे थे पत्र में …………..

वाक्यों को मिलाकर पढ़ा था श्रीकृष्ण नें………….उफ़ !

लिखा था – “हा राधे ! तुम कहाँ खो गयी हो……रूठो मत ….अच्छा ! तुम्हारा प्रेम जीता , मेरा हार गया……अब आजाओ प्यारी !

ये कैसा विलक्षण पत्र है ?

पत्र लिखनें से पूर्व श्रीकृष्ण को याद किया होगा ……..बस श्रीकृष्ण को याद करते ही ….अपनें को भूल गयीं श्रीराधा……..कृष्ण बन गयीं ।

कृष्ण बनीं राधा …….राधा को पत्र लिखती है ………..

उफ़ ! ये कैसा विलक्षण प्रेम है……..सब उल्टा पुल्टा हो गया था ।


हे गोविन्द ! जिस स्थिति को पानें के लिये …..हम ज्ञानियों को क्या क्या नही करनें पड़ते ………पर श्रीराधा रानी सहज प्रेम से उस उच्च स्थिति में स्थित हैं ……धन्य हो ! उद्धव जी कहते हैं ।

फिर कैसे नही बनाता उन्हें मैं अपना गुरु ?

देहातीत महापुरुष सहज नही मिलते …….पर आपकी कृपा से मुझे बड़े बड़े महापुरुषों की भी आराध्या श्रीराधारानी गुरु के रूप में मिलीं ।

उद्धव इतना बोलकर चुप हो गए थे ………………

और क्या गुण देखे तुमनें उद्धव ! श्रीराधा में ?

श्रीकृष्ण नें पूछा था उद्धव से ।

शेष चरित्र कल –

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Author: admin

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