श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा संस्थान दुनेठा दमण ने जगन्नाथ भगवान की रथ यात्रा दुनेठा मंदिर से गुंडीचा मंदिर अमर कॉम्प्लेक्स तक किया था यात्रा 27 जुन को शुरु हुई थी, 5 जुलाई तक गुंडीचा मंदिर मे पुजा अर्चना तथा भजन कीर्तन होते रहे यात्रा की शुरुआत से लेकर सभी भक्तजनों ने सहयोग दिया था संस्थान के मुख्या श्रीमति अंजलि नंदा के मार्गदर्शन से रथ सफल रही,
जगन्नाथ भगवान की घर वापसी यात्रा, जिसे “Bahuda Yatra” या “उलटी रथ यात्रा” भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनकी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को विशाल रथों पर बैठाया जाता है और भक्तों द्वारा मुख्य मंदिर पर नगर भ्रमण कराते हुए लाया जाता है।
विशेष टीम्पनी:
- रथ यात्रा का महत्व: रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को आम जनता के बीच लाया जाता है, जिससे भक्तजन अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकें। यह यात्रा भगवान के लिए उनके भक्तों की भक्ति और प्यार का प्रतीक है।
- भक्तों का उत्साह: इस दौरान लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं, जो अपने समर्पण और भक्ति के साथ रथ खींचते हैं। यह एक जबरदस्त दृश्य होता है, जिसमें श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह साफ नजर आता है।
- संस्कृति और परंपरा: यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह अपने साथ सामुदायिक एकता और भारतीय संस्कृति की जड़ों को भी प्रस्तुत करती है।
- संपूर्ण उत्सव: रथ यात्रा के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य, और अन्य धार्मिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जिससे वातावरण में भक्ति की गूंज होती है।
जगन्नाथ भगवान की घर वापसी यात्रा ना केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करती है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ लाने का कार्य भी करती है। यह यात्रा जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूती है और लोगों के दिलों में एकता और प्रेम की भावना को समृद्ध करती है।
