श्रीकृष्णचरितामृतम्
!! महारास में गोपेश्वर महादेव – “रासपञ्चाध्यायी” !!
भाग 1
नभ में भी नृत्य प्रारम्भ कर दिया था सुरस्त्रियों नें …..पर बृजांगनाओं का अद्भुत नृत्य देखकर वो सब लज्जित हो गयीं थीं ।
बृज देवियों का सौन्दर्य और अप्सराओं का सौन्दर्य बहुत अंतर था दोनों में …………..कहाँ देव वधू और कहाँ श्रीकृष्ण वधू …….अंतर तो आकाश पाताल का था ।
देवता ही स्वयं कह उठे थे ………हे देवियों ! तुम मत नाचों जो माधुर्य उन बृज गोपियों में है ………वो तुममें कहाँ ! देवियां लज्जित होकर विमानों में बैठ गयीं थीं……………..
अद्भुत ! आनन्द !
एकाएक भूतभावन भगवान शंकर बोल उठे थे ।
भगवती उमा नें नभ से श्रीधाम वृन्दावन में देखा ………..
श्रीकृष्णचन्द्र का नर्म स्पर्श पाते ही सुध बुध खो बैठीं थीं गोपियाँ ….उनके पद , उनके पद की गति तीव्र से तीव्रतम होती जा रही थी …….रासेश्वरी साथ में थीं रासेश्वर बन ठन के नृत्य का कौशल दिखा रहे थे……..अब नृत्य में और वेग आगया था ……गायन तो शान्त हो गया बृजगोपियों का ……पर नृत्य , अब तो केवल नृत्य रह गया था ।
मध्य में रासेश्वर को खड़ा कर….स्वयं उनके चारों ओर घूमनें लगीं थीं ……..क्या दिव्य शोभा थी वहाँ की ………..गोपियों के करधनी की ध्वनि , नूपुर , किंकिणी की ध्वनि ……….ये अनन्त गोपियों की जब एक साथ बज उठी ……..तब नभ में देवर्षि नारद जी भी नाच रहे थे ।
गन्धर्वों से बारबार कह रहे थे देवर्षि ………कुछ तो बजाओ वाद्य ……तुम्हारा वाद्य धन्य हो जाएगा ……..ऐसी दिव्य वेला में नही बजाओगे तो कब बजाओगे ? पर क्या बजाते ? क्या उनसे बजाया जाता ……नही बजाया गया …………वो कोशिश कर रहे थे ……पर ये महारास था …….इसमें कौन सा सुर उठ रहा है …और कहाँ जा रहा था ……ये महान संगीतज्ञ गन्धर्व भी समझ ही नही पाये ।
तभी – महारास का दर्शन करके महादेव को इतना आनन्द आया कि वो श्रीधाम वृन्दावन के लिये उतरनें लगे थे नभ से …………भगवती उमा को सावित्री नें कहा ……..महादेव तो लगता है वृन्दावन ही गए !
बड़े ध्यान से देखती रही थीं भगवती उमा …………….कि उनके पति भगवान शंकर जाते कहाँ हैं ……………..
आप नही जा सकते ।
श्रीजी की दो सखियों नें महादेव को रोक दिया था ।
पर मैं महादेव ! अपना परिचय देते हुए भी आनन्दित थे महादेव ।
इसलिये नही जा सकते ………सखियाँ भी हँसी ।
मैं समझा नही बृज गोपियों ! महादेव भोले बाबा हैं ।
आप पुरुष हैं ………..और रास में पुरुष का प्रवेश कहाँ ?
हाँ , यहाँ तो एक ही पुरुष हैं …….श्यामसुन्दर ……बाकी सब गोपियाँ हैं ………..इन सखियों ने “प्रेमपत्तनम्” के संविधान समझा दिए थे ।
*क्रमशः …


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