श्रीकृष्णचरितामृतम्
!! श्यामाश्याम द्वारा अद्भुत शिवार्चना !!
भाग 2
बृजराज तो शिवालय को धोकर …………..बड़े प्रेम से वहाँ के ब्राह्मणों को दान देनें लगे थे …………वो सारी दान की सामग्रियाँ बैल गाड़ियों में भरकर ही नन्दगाँव से लाये थे …..अन्न वस्त्र धन र खूब लुटानें लगे थे बृजराज ।
पर उनके लाडले श्रीकृष्ण….अम्बिका वन में चले गए ।
“मुझे बिल्व पत्र चाहिये ……..मनसुख ! एक भी बिल्ब पत्र में छिद्र न हो ….ध्यान देना”…….मनसुख चढ़ गया था बिल्व के वृक्ष में ……..वो तोड़ रहा था पत्र ……नीचे से कन्हैया उसे बता रहे थे ।
ये आँक के पुष्प…….श्रीदामा नें आकर दिखाये ।
इसकी तो पूरी माला बनाई जाय और महादेव को अर्पण किया जाए …..कैसा रहेगा श्रीदामा ! श्रीकृष्ण नें श्रीदामा से ही पूछा ।
बहुत बढ़िया ………इससे बढ़िया बात और क्या होगी …..तो मैं आँक के पुष्प खूब सारे तोड़ता हूँ……….श्रीदामा चला गया ……अर्क पुष्प तोड़ने ……..मनसुख बिल्ब पत्र तोड़ ही रहा था ….अन्य सखाओ को भी विजया के पत्र इत्यादि के लिये भेज दिया था ।
तभी – श्रीराधारानी अम्बिका वन में दिखाई दीं ……..वो लता के एक झुरमुट से निहार रही थीं अपनें श्याम सुन्दर को ………श्याम सुन्दर नें देख लिया तो वो दौड़े ………और श्रीराधा रानी के पास जाकर सीधे हाथ पकड़ लिया………वो शरमा कर जानें लगीं …..तो ……
कहाँ जा रही हो राधे ! क्या शिवार्चना नही करोगी ।
करूंगी ! संक्षिप्त सा उत्तर दिया
सुनो ! श्रीराधारानी नें श्यामसुन्दर की ओर देखा ।
हाँ कहो , !
अम्बिकावन झूम उठा था इन सनातन प्रेमियों को अपनें यहाँ पाकर ।
“मैं तुम्हारे साथ भगवान शिव की अर्चना करूंगी”…….बड़े ही प्रेमासिक्त होकर श्रीजी नें अपनें श्यामसुन्दर से कहा ।
हाँ हाँ , प्यारी ! हम दोनों साथ ही साथ करेंगे भगवान शिव की पूजा ।
तो चलो ! स्वयं ही पुष्प तोड़ते हैं , ये कहते हुये श्रीराधा रानी नें श्याम सुन्दर को अपनी ओर खींचा…..क्यों की इस समय वहाँ कोई नही था ।
अर्क के पुष्प , धतूरा , विजया ……………श्याम सुन्दर स्वयं तोड़ रहे हैं …………श्रीजी तोड़ना चाहती हैं …..पर ये तोड़नें नही देते …….
काँटे हैं …..गढ़ जाएंगे …….हे राधिके ! आप बड़ी कोमलांगी हैं ।
श्याम सुन्दर बड़े ही प्रेम से श्रीजी को सम्भाल कर वन में घुमा रहे हैं ।
अरे ! तू यहाँ है ? सखा सब आगये थे वहीं ………….और श्याम सुन्दर को देख लिया था …….।
श्रीजी ! आप यहाँ हैं ? सखियाँ भी आगयीं थीं उन्होंने भी श्रीराधारानी को देख लिया था ।
दोनों चले गए …………….क्यों की आज शिवरात्रि है ……….और आज तो रात भर अभिषेक ही चलनें वाला है ।
दिव्य थी ये शिवरात्रि …….महादेव भी आज प्रसन्न हैं ………क्यों न हों जग वन्दन नन्द नन्दन और उनकी अल्हादिनी आज महादेव का अभिषेक करेंगी………जय हो ।
सहस्र सहस्र घट दुग्ध के , इतनें ही दही के , घृत के , मधु , शर्करा और शुद्ध जल …….ये सब लाकर रख दिया गया है ……
आहा ! बड़ा अद्भुत सजाया है शिवालय को इन बृजवासियों नें ……..आम के पल्लवों से ……अशोक के पत्रों से ………पीली पीली ध्वजा पताकाओं से ……..सुगन्धित धूम्र से महक रहा था वो शिवालय ……ब्राह्मण लगातार वैदिक मन्त्रों का सस्वर उच्चारण कर रहे थे ।
मैया यशोदा को चिन्ता है……..मेरा लाला भूखा है सबेरे से …….कुछ नही खाया उसनें ………..मैया की अपनी चिन्ता है ।
उधर से श्याम सुन्दर आये………इधर से बृषभान नन्दिनी आईँ ….सखाओं के साथ श्यामसुन्दर थे …..और सखियों के साथ श्रीराधारानी …………
बृजराज नें कह दिया था ……….हम लोग मात्र अपना हाथ लगाएंगे रुद्राभिषेक में ……….पर मुख्य रूप से रुद्राभिषेक मेरा लाला ही करेंगा …….क्यों की उसके मंगल के लिये ही तो हम ये सब कर रहे हैं ।
कन्हैया आये …….बड़ी सुन्दर सी पीताम्बरी धारण कई हुये हैं ……एक उत्तरीय कन्धे में है ……..घुँघराले केश बिखरे हुये हैं ……….आहा !
इधर श्रीराधारानी नें पीला लहँगा धारण किया है आज ………वस्त्र सब पीले हैं ………….अद्भुत छबि है उनकी तो ।
श्याम सुन्दर को ही खड़ा किया अभिषेक के लिये …………श्याम सुन्दर खड़े हैं ……पर वो तो अपनी प्रिया को ही देख रहे थे ………..कीर्ति रानी से यशोदा जी नें कहा …….राधा बेटी भी कर लेगी अभिषेक ………उसका भी मंगल होगा ……….कीर्ति रानी मुस्कुराईं …….अपनी लाडिली से बोलीं ……बेटी ! जा तू भी कर ले अभिषेक ।
बस , तात ! दोनों युगलवर नें महादेव का अभिषेक प्रारम्भ जब किया …….वेद मन्त्र स्वयं प्रकट होकर इन युगलों को नमन कर रहे थे ……
महादेव अति आनन्दित थे ………….दूध, दही घी, मधु, शर्करा शुद्ध जल ….इन सबसे अभिषेक किया दोनों युगल सरकार नें ……..बिल्ब पत्र चढाया …..आँक के पुष्प चढाये ……विजया इत्यादि अर्पण कर भोग लगाया ….आरती की …………..हर हर महादेव ! सब बृजवासी जोर से बोल रहे थे ………….श्रीराधारानी नें अपनें प्रियतम श्याम सुन्दर को देखा ….और कुछ देर तक देखती ही रहीं …………।
हर हर महादेव ! मनसुख नें ये जयकारा लगाया ……..
……नही तो दोनों की तो समाधि ही लग गयी थी ।
तभी –
*शेष चरित्र कल


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