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August 29, 2025 11:39 pm

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કેતન પટેલ પ્રમુખ ए ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસપ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિ, દમણ અને દીવ દ્વારા ૨૫/૦૮/૨૦૨૫ ના રોજ પ્રફુલભાઈ પટેલને પત્ર લખ્યો છે દમણ જિલ્લાને મહાનગર પાલિકામાં અપગ્રેડ કરવાનો પ્રસ્તાવ

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श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! अक्रूर पहुँचे वृन्दावन !!-भाग 2 : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! अक्रूर पहुँचे वृन्दावन !!-भाग 2 : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्

!! अक्रूर पहुँचे वृन्दावन !!

भाग 2

काका ! चलें ! आप भी थक गए हो ऐसा लगता है ………..अक्रूर को लेकर राम कृष्ण और समस्त ग्वाल बाल नन्दालय में गौओं को लेकर आगये थे …….गौओं को गौशाला में गोपों नें बांध दिया था ।


मैया ! बाबा ! देखो कौन आया है ?

नन्दालय में प्रवेश करते ही श्रीकृष्ण नें आवाज लगाई ।

कौन आया है ? मैया बाहर आयी …….बाबा नन्द बाहर आये ।

अरे ! अक्रूर ? बृजराज चौंक गए ।

अक्रूर ? बृजरानी भी चौंकी …….साथ में रोहिणी भी ।

कैसे रास्ता भूल गए कंस के सेनापति ? व्यंग किया बृजराज नें ।

अब ऐसे मत कहिये …….आप सब जानते ही हैं पेट के लिये सेवक बना हूँ कंस का …………बाकी तो क्या कहूँ नन्दभैया ! ………..अक्रूर नें आगे बढ़ते हुये नन्दबाबा के चरण छूए ।

भाभी ! मैं आना चाहता था पर कार्य इतना है उस दुष्ट कंस का ….कि मुझे अवसर ही नही मिला ।

अच्छा अच्छा ठीक है …….पहले हाथ पैर धो लो …..भूख लग रही होगी ……यात्रा से आये हो ……..कन्हैया ! हाथ पाँव धुवा दो और काका को शीघ्र भोजन कक्ष में ले आओ ……हम सब मिलकर भोजन करेंगे ।

ठीक है बाबा !

चलो काका !       कन्हैया हाथ पाँव धुवाते हैं  ।

ग्वाल बाल अपनें अपनें घरों में उदास से चले गए थे ।


क्यों आये हो कोई विशेष कार्य ?

भोजन करते हुये बृजराज पूछ रहे हैं अक्रूर से ।

हाँ, कंस नें आपके लिये एक पत्र दिया है ….भोजन के समय ही अक्रूर नें बृजराज से कहा था …..यशोदा का हृदय स्तब्ध हो गया ……ओह ! ये क्या हुआ ?

कंस का दूत बनकर आया है ये अक्रूर ? दाल लेकर आईँ थीं बृजरानी …….और अक्रूर को दे रही थीं …..जैसे ही सुना कंस का पत्र ? हाथ काँप उठे …….दाल फ़ैल गया ।

मैं पोंछ देती हूँ ……जीजी ! आप जाओ भीतर……मैं भोजन करा दूँगी ।

रोहिणी समझ गयी हैं कि बृजरानी जीजी आज होश में नही हैं ।

कन्हैया भी देखते रहे अपनी मैया को ………वो समझ तो सब रहे हैं ।

भोजन हो गया था सब लोगों का । कन्हैया नें हाथ धुलवाया ।


“ये पत्र है” ……….भोजन के बाद सब लोग बैठे थे राम कृष्ण बृजराज बृजरानी रोहिणी मैया …..सब बैठे हैं …….उस समय पत्र निकाल कर बृजराज को अक्रूर नें दिया ……….।

मुझे अक्रूर अच्छा नही लग रहा….रोहिणी के कान में बृजरानी कहती हैं ।

पत्र पढ़ लिया था बृजराज नें ………….बृजरानी अपनें पति के मुख को ही देख रही थीं …….और मुख के भाव को पढ़ना चाह रही थीं ।

पत्र पढ़कर रख दिया बृजराज नें ।

क्या लिखा है ? बृजरानी नें पूछा ।

कुछ नही ……..राजा कंस नें हम बृजवासियों का आदर किया है ………इसलिये तो धनुष यज्ञ में हम लोगों को बुलाया है ।

बृजराज नें कहा ।

रोहिणी ! तू पत्र पढ़ ना ! और मुझे सुना ।

रोहिणी नें बृजराज के पास से पत्र लिया …………और बृजरानी को ही धीरे धीरे सुनानें लगी ।

हे बृजपति नन्द जी !

आपको सूचित करते हुये मैं आनन्दित हूँ कि ……….हमारे मथुरा में अपनें गुरुदेव देवर्षि नारद जी कि आज्ञानुसार धनुष यज्ञ का एक आयोजन किया जा रहा है ……….बहुत विशाल यज्ञ होगा ………देश विदेश से लोग आरहे हैं ……..मैं चाहता हूँ आप हमारे बृज के मुखिया हैं इसलिये आप अवश्य पधारें ……..और अपनें साथ अपनें दो सुन्दर पुत्रों को लेकर इस यज्ञ कि शोभा बढ़ाएं ……..बालक यज्ञ का दर्शन करेंगे तो उन्हें भी अच्छा लगेगा …………..आप आएंगे अपनें पुत्रों के सहित इसी आशा के साथ ………

महाराजा कंस ।

मेरा पुत्र नही जायेगा ……..मेरा लाला नही जायेगा ………मैनें कह दिया मेरा लाला नही जायेगा ….नही जायेगा नही जायेगा ।

आक्रामक हो उठीं थीं वो भोली भाली मैया …………..इस तरह के व्यवहार कि किसी को अपेक्षा नही थी ……..इनका मुँह कभी अपनें पति के आगे इस तरह खुला नही था …….न अपनें पति की इन्होनें बात ही काटी थी ………पर आज !

हिलकियों से रो पडीं ………”मेरा लाला नही जाएगा”………फिर अपनें लाला को लेकर वहाँ से चली गयीं यशोदा मैया ।

शेष चरित्र कल –

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