श्रीकृष्णचरितामृतम्
!! “उद्धव बद्रीनाथ जाओ” – उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 89 !!
भाग 1
उद्धव ! मन ही सबका कारण ….बन्धन और मुक्ति का ।
भगवान श्रीकृष्ण मेरे बिना पूछे ही बोले थे ।
लोग अन्यान्य को भी तो दोष देते हैं ….जैसे काल , देव , कर्म , ग्रह ….ये मेरा प्रश्न था । मैं चाहता था भगवत्वाणी मेरे कानों में और जाए ….इसलिए मैं प्रश्न किए जा रहा था ।
किन्तु तात ! भगवान श्रीकृष्ण को अपने लीला समेटने की शीघ्रता थी …..संक्षिप्त में ही उन्होंने मुझे उत्तर दिया …………
नही , उद्धव ! मनुष्य के सुख दुःख के कारण न देवता हैं , ग्रह भी नही है और काल भी नही , केवल मन है …..कोई किसी को सुख दुःख नही देता …अपने मन से ही मनुष्य सुख दुःख का भोक्ता बना फिरता है । इसलिए उद्धव ! अपने मन प्रशिक्षण दो …..उसे पहले शुद्ध करो ….अच्छे अच्छे महात्माओं का संग करो ….उनके सत्संग का निरन्तर श्रवण मनन निरीध्यासन करो….इससे मन की शुद्धि होगी …उद्धव ! सत्संग की बहुत महिमा है …सत्संग के बराबर कोई साधना नही है ।
सत्संग से ही मन शुद्ध होता है ….मन के शुद्ध होने से प्रसन्नता बनी रहती है ।
इसलिए सतंसग करते रहना चाहिए …बड़े बड़े सिद्ध भी अन्य साधना को छोड देते हैं पर सत्संग वो भी नही छोड़ते ….मन का कभी भरोसा मत करना ….उद्धव ! इसलिए मैं कह रहा हूँ सत्संग करो …सत्संग मत छोड़ो । भगवान इतना ही अंतिम में बोल कर मौन हो गए थे ……..
क्रमशः …
शेष चरित्र कल-


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