श्रीकृष्णचरितामृतम्
!! “ओह, शाप की ये परिणति” – उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 91 !!
भाग 2
दारुक की बातें बस सुन रहे थे भगवान …..वो शान्त गम्भीर बने रहे ….कुछ नही बोले ।
आप देखिए तो बाहर का दृश्य ! दारुक रो रोकर बोल रहा था …..पर भगवान ने उस ओर देखा ही नही ……क्या देखते …..सब कुछ इन्हीं की लीला तो थी ।
देखते ही देखते शवों का अम्बार लग गया था । येसा भयावह दृष्य प्रकट हो गया ।
शस्त्र समाप्त हो गए इनके …धनुष टूट गए तलवारें तक टूट गयी थीं ….अब ?
क्या आपस का इनका युद्ध अब समाप्त हो जाएगा ……..दारुक ही बेचारा ।
पर ये क्या ! इतनी जल्दी कैसे शान्त हो जाता ये युद्ध ।
शस्त्र नही हैं तो क्या हुआ …….एरका नामक जो तीखे घास थे …समुद्र किनारे उन्हें ही उखाड़ कर एक दूसरे पर प्रहार करना शुरू कर दिया था इन लोगों ने …..और आश्चर्य ! उस घास से भी ये लोग आपस में कटने और मरने लगे थे ……
अरे ! ये क्या अर्जुन ! दारुक ने दौड़कर भगवान से कहा …..अर्जुन आगये ……वो उसी समय रथ लेकर आगये थे ….आने दो …..भगवान शान्त स्वर में ही बोले ।
ये सब क्या है मेरे गोविन्द ! अर्जुन चरणों में गिरकर रोने लगा था।
तुम्हें मेरा एक काम करना है ….भगवान अर्जुन से कह रहे हैं ।
बाहर चीख पुकार मच रही है ।
मेरी बातों को ध्यान से सुनो अर्जुन ! मेरे इस धरा को छोड़ते ही द्वारिका समुद्र में समा जाएगी ।
नाथ ! अर्जुन चीख पड़ा …..आप इस धरा को छोड़ रहे हैं ।
हाँ अर्जुन ! अब सुनो मेरी बात ध्यान से …..मेरे धरा को छोड़ते ही मेरी रानियों को तुम अपने साथ वृन्दावन लेकर चले जाना ……वहाँ की भूमि इनको शान्ति देगी …..मेरी इतनी आज्ञा मानोगे ना ! अर्जुन के स्कन्ध में भगवान ने हाथ रखते हुए पूछा था ।
अर्जुन बिलखता जा रहा है ।
तभी – ये सब क्या हो रहा है ……कृष्ण ! तुम रोकते क्यो नही ये सब !
बलराम जी ने प्रवेश करते ही अत्यन्त विचलित स्वर में भगवान श्रीकृष्ण से कहा था ।
आज क्रोध नही था बलभद्र था ….क्या क्रोध करते कुल आपस में कट कर मर रहा था इनका ।
हाँ अपने बड़े भ्राता को देखकर भगवान श्रीकृष्ण थोड़ा मुस्कुराए अवश्य थे ।
बड़े भैया ! आप रोक सको तो देख लो ….वैसे समय बीत चुका है ।
पर तुम रोक सकते थे ना कृष्ण ! भैया ! हज़ारों अभी भी बचे हुये हैं ….बचा लो ….
भगवान ने संकर्षण को इतना कहा और अर्जुन से फिर बातें करने लगे ।
बलराम जी ने बाहर की ओर देखा ….शवों का ढेर बढ़ता ही जा रहा था …..बलभद्र बिना कुछ सोचे विचारे बचाने के लिए पारिवारिक समर में कूद गए ……किन्तु !
शेष चरित्र कल –
