विरही- गोपी- उध्धव छे- संवाद-७🦚🌹 भ्रमर -गीत🌹👉 श्रीकृष्ण – उध्दव संवाल- उध्धव को गोकुल क्यां भेजा ? : Niru Ashra

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विरही- गोपी- उध्धव छे- संवाद-७🦚
🌹 भ्रमर -गीत🌹
👉 श्रीकृष्ण – उध्दव संवाल- उध्धव को गोकुल क्यां भेजा ?

🪷 उद्धव उपदेश दे कहते भगवान् आप ब्रज भेजकर मेरा समय व्यर्थ बिगाड़ोगे? इससे उत्तम होगा आप हर पखवाड़े में खत (हालचाल विषय) लिखो और वे पत्र पढ़कर खुश होंगे? वे सभी पत्र पढ़ उत्तर अवश्य लिखेगें जिससे आपको भी आनंद मिलेगा। प्रेम तत्त्व समझ से उद्धव बहुत दूर है। मुझे पत्र लिखने की सलाह दे रहा है। उद्धव क्या जाने श्रीकृष्ण गोपी है – गोपी श्रीकृष्ण है।

🍁 भगवान् उवाच:

🪷 भैय्या उद्धव, आपने पत्र लिखने का कहा (गोकुल) बात तो ठीक है। पर लिखने बैठता हूँ समझ नहीं आता क्या लिखूं? कलम आगे नहीं चलती है। फिर विचार आता यदि पत्र लिखूंगा तो सब सोचेगें अब क्यों आवेगा? अतः पत्र लिखा भी तो पत्र से बहुत दुःखी होंगे। इसलिए उद्धव आप ब्रज में पधारिये (जाओ) और अपने ज्ञान, ब्रह्मचिंतन से सभी को समझाइश करे कि कृष्ण माता-पिता, गोप-गोपियाँ को भूले नहीं है। आप हमारे माता-पिता को प्रसन्न कीजिये, और गोप-गोपियों को विरह व्यथा से मुक्त कर वापस आना। “ज्ञानी व्यक्ति क्या जाने भक्त की हृदय मनोदशा”

🙏 श्रीकृष्ण फिर उद्धव को कहते हैं : भैय्या मेरी हालत ऐसी हो गई कि मैं ब्रज में माता-पिता, सखा, गोपियों का ऋणी हूँ और सबके सामने जाने से लज्जा-शरम आ रही है कैसे मुँह दिखाऊँगा जैसे कोई कर्जदार कर्ज न चुकाने की दशा में गाँव छोड़, भागकर मुँह छिपाता है। अतः उद्धव उन्हें सांत्वना संदेश दे संतुष्ट कीजिये।

🙏 भैय्या उद्धव : मुझे एक पश्चाताप हो रहा कि पूतना मुझे मारने आई फिर भी उसे मोक्ष दिया और माँ यशोदा तो दुध स्तनपान करवाने वाली माँ के ऋण को कैसे चुका पाऊंगा? इस जनम तो क्या अनेकों जनम में माँ का ऋण नहीं भर सकता, ऐसा आप भैय्या ब्रज जाकर सबसे कहना।

🪷 “उधो इतनो कहियो जाई, हम आवैगे दोउ भाई।
यद्धपि इहा अनेक भांतिसुख, तदेपि रह्यो नहीं जाई ||
सुरदास देखौ ब्रजबासिनी तबहि हियो सिराई।” –

🍁 सुरदास
भगवान् श्रीकृष्ण कहते सुनो भैय्या उद्धव : आप ब्रज में जाकर कहना हम दोनों भाई जरूर वापस आऐगें। माँ यशोदा ने अपने को हमारी दाई-आया कैसे कहाँ? इसका हमें अत्यंत दुःख है कहना। नंदबाबा का समझदारी धीरज से सफेद गंगा और घुमरी गौए दु:खी न हो। मथुरा का धन, वैभव, ऐश्वर्य, राज-काज सुख बहुत है किन्तु ब्रज भूलता नहीं। हमें ब्रजवासी मिलेंगे तब ही आनंद सुख मिलेगा। सब को कहना हम दोनों भाई कुछ समय बाद अवश्य आने वाले हैं। 🪷 विरही गोपी-८
🍁 क्रिष्णा 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

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