!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 69 !! बृज के बिरही लोग बेचारे…भाग 3 : Niru Ashra

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!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 69 !!

बृज के बिरही लोग बेचारे…
भाग 3

यही ग्वाल बाल जो बढ़ चढ़ कर बोले जा रहे थे ………….अब वही बोल भी नही पा रहे थे ।

नही आया ? ओह ! रोना, सुबकना , ये तो सामान्य बात है …………….जड़वत् हो गए थे कुछ देर के लिये ।

तुम कौन हो ? ये भी बड़ी मुश्किल से पूछ पाये थे ।

मैं कृष्ण दूत उद्धव !

……उद्धव नें अपनें आपको “कृष्ण दूत” कहकर परिचय दिया ।

मनसुख हँसा ……..ये हँसी दुःख के अति होनें पर आती है ।

अच्छा ! हमारा कन्हाई अब दूत भेजनें लगा ………देखो ! हमारे कन्हाई का ये दूत है ………….

क्यों ? तुम्हे क्यों भेजा है यहाँ उसनें …….मनसुख बोले जा रहा है ।

अब तो हमारे पास कुछ नही है तुम लोगों को देनें के लिये
हे मथुरा वासी !……….हमारी निधि तो कन्हाई ही था जिसे तुम ले जा चुके हो……..अब क्यों आये हो ?

फिर एकाएक रो पड़ा मनसुख………..हमें कंगाल बना दिया तुम मथुरा वासियों नें……..हम कितनें धनी हुआ करते थे ……..पर हमारे जीवन धन को तुम लोगों नें छीन लिया……..अब क्या लेनें आये हो ?

मनसुख रोता जा रहा है………कंस मर गया ना अब ! तुम लोग इसलिये लेगये थे ना हमारे कन्हाई को ….अब मर तो गया …….अब क्या लेनें आये हो…….हमारे पास अब कुछ नही है अब ।

मधुमंगल आगे आया……..हमें लेने आये हो ? बोलो कन्हाई के दूत !

क्यों अब कंस के श्राद्ध के लिये तुम लोगों को यहाँ से कोई चाहिए ?

बहुत स्वार्थी हो रे ! ले गया था अक्रूर हमारे प्राणधन को ……वापस छोड़ देना चाहिये ना ! पर नही……..हाँ तुम लोगों को क्या मतलब ? अपनें अपनें में लगे रहते हो !

मैनें पूछा है आप लोगों से – कहाँ हैं नन्दभवन ? उद्धव नें फिर पूछा ।

ओह ! इन्हें हमसे कोई देना देना नही है ……….सुनो ! तुम्हे नन्दभवन जाना है ना ……….तो एक निशानी बताते हैं तुम्हे ………….

ये जो पनारा निकल रहा है ना ……पानी का पनारा ……..बस इसके साथ साथ चलते रहो ……ये जहाँ से निकल रहा होगा ……बस नन्दमहल वही है ………..ये कहते हुए ग्वाल बाल चुप हो गए ।

मैं समझा नही …..उद्धव नें फिर पूछा…….ये पानी जहाँ से आरहा है ?

हाँ कृष्ण दूत ! ये पानी नही हैं ……….ये हमारी यशोदा मैया के अश्रुधार हैं …….जो निरन्तर बहते रहते हैं ……….देखो ! ऐसी स्थिति होगयी है यहाँ ……….देखो जा कर ….उस मैया को ……..अपनें लाला के वियोग में कैसी मरणासन्न सी हो गयी है ।

उद्धव के ज्ञान को पहली बात झटका लगा…….ओह ! ये कैसी स्थिति है………निरन्तर व्याकुलता ?

उद्धव की बुद्धि यहीं से जबाब दे जाती है …………..

शेष चरित्र कल –

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