केशव बटाक ने बैंकों की लेटलतीफी पर RBI गवर्नर का दिलाया ध्यान, कहा: सरकार विदेशी पूंजी निवेश को प्रयासरत और बैंक NRIs ग्राहकों को कर रहे हैं हैरान परेशान

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केशव बटाक ने बैंकों की लेटलतीफी पर RBI गवर्नर का दिलाया ध्यान, कहा: सरकार विदेशी पूंजी निवेश को प्रयासरत और बैंक NRIs ग्राहकों को कर रहे हैं हैरान परेशान

  • KYC अपटेड करने में हफ्ते भर दौड़ाना बेशकीमती समय की बर्बादी
  • भारत के बैंकों में एनआरआई ग्राहक के लाखों रूपया जमा होने के बाद भी ट्रांजेक्शन नहीं होने पर एकाउंट बंद कर देनासभारत के अलावा यूके, यूएसए, आस्ट्रेलिया कहीं भी नहीं होता
    एनआरआई ग्रुप लंदन-यूके के कन्वीनर केशव बटाक ने भारत में सरकारी एवं गैर-सरकारी बैंकों के कथित लेटलतीफ रवैये पर रिजर्व बैंक के गवर्नर को पत्र लिख कर अपनी नाराजगी जताई है। केशव बटाक ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास को आज भेजे पत्र में लिखा है कि एक ओर भारत सरकार देश में विदेशी पूंजी निवेश के भगीरथ प्रयासों में जुटी है, वहीं दूसरी ओर भारतीय बैंक अनिवासी भारतीयों को जटिल प्रक्रियाओं में उलझा कर उनका बेशकीमती वक्त बर्बाद कर रहे हैं। एसबीआई जैसे प्रमुख सरकारी बैंकों का अनिवासी भारतीयों के प्रति ऐसा रवैया भारत सरकार के अप्रवासी भारतीय हितों के संरक्षण की सोच से भिन्न और तकलीफदेह है। एसबीआई जैसे प्रमुख बैंकों में केवाईसी अपडेट करने के नाम पर अनिवासी भारतीयों को हफ्ते भर दौड़ाया जाता है। जबकि केवाईसी अपडेट जैसे मामूली कामों को घंटे, दो घंटे में निपटा देना चाहिए। इसमें बैंक को अपना और ग्राहकों दोनों का वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए। यह समस्या भारत के सरकारी व गैरसरकारी दोनों में समान रूप से विद्यमान है। केवाईसी अपडेट करने जैसे भारतीय बैंकों के झमेले यूके, यूएसए, आस्ट्रेलिया आदि देशों में नहीं हैं। वहाँ विदेशों में एक बार बैंक एकाउंट खुल गया तो जीवनभर केवाईसी वगैरह की दरकार नहीं है। भारत में केवाईसी अपडेट करने में बैंक अनिवासी भारतीयों से वर्षों पुराना वो मोबाइल नंबर मांगते हैं जो उन्होंने एकाउंट खोलते या ऑपरेट करते वक्त इस्तेमाल किया था! जबकि उस पुराने मोबाइल नंबर का इस्तेमाल तो एनआरआई खाताधारक वर्षों पहले ही बंद कर चुका होता है। क्योंकि अनिवासी भारतीय विदेशों में जहाँ रहते हैं वे वहाँ उस देश के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। वो कथित पुराना भारतीय मोबाइल सिम नंबर इस्तेमाल नहीं होने से बंद हो जाता है। ऐसी सूरत में भारतीय बैंकों को एनआरआई खाताधारकों से पुराने रजिस्टरर्ड मोबाइल नंबरों की जगह नये भारतीय मोबाइल नंबर लेकर केवाईसी अपडेट कर देना चाहिए। भारतीय बैंकों में अनिवासी भारतीयों के बैंक खातों को नियमित ट्रांजेक्शन नहीं होने के आधार पर बंद कर दिया जाता है जबकि उसमें बड़ी धनराशि जमा होती है! विदेशों में एक बार बैंक एकाउंट खुल गया और फिर आपने कभी भी दुबारा ट्रांजेक्शन नहीं किया हो तो भी आप 20 से 50 वर्ष के बाद भी एटीएम में कार्ड से रकम निकालेंगे तो धनराशि निकलेगी, बशर्ते आपका डेबिट / क्रेडिट कार्ड एक्सपायर नहीं हुआ हो। लालफीताशाही और जटिल प्रक्रियाएं भारत के तीव्र विकास की राह में बाधक हैं। प्रक्रियाओं को कस्टमर फ्रैण्डली बनाना जरूरी है। मोदी सरकार ने कइयों पुराने अव्यवहारिक कानूनों को हटाया है। अब बैंकों के लेटलतीफी रवैये को बदलने और प्रक्रियाओं को अधिकतम उदार बनाने की जरूरत है। अनिवासी भारतीय समयाभाव में सीमित समय के लिए भारत आते हैं। ऐसे में अनिवासी भारतीयों के बैंकों और अन्य सरकारी विभागों / प्रतिष्ठानों से संबंधित कार्यों को अपेक्षाकृत अधिक जवाबदेही व तत्परता से निपटाने हेतु आरबीआई को जरूरी कदम उठाने चाहिए। खासकर जमाकर्ताओं से एसबीआई के रूखे रवैये को सुधारने की जरूरत है।
    लि.
    एनआरआई ग्रुप, लंदन-यूके
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