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August 30, 2025 2:42 am

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કેતન પટેલ પ્રમુખ ए ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસપ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિ, દમણ અને દીવ દ્વારા ૨૫/૦૮/૨૦૨૫ ના રોજ પ્રફુલભાઈ પટેલને પત્ર લખ્યો છે દમણ જિલ્લાને મહાનગર પાલિકામાં અપગ્રેડ કરવાનો પ્રસ્તાવ

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श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! महालक्ष्मी का प्रवेश निषेध – “रासपञ्चाध्यायी” !!-भाग 1 : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! महालक्ष्मी का प्रवेश निषेध – “रासपञ्चाध्यायी” !!-भाग 1 : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्

!! महालक्ष्मी का प्रवेश निषेध – “रासपञ्चाध्यायी” !!

भाग 1

आहा ! रास एव उत्सवः – रस समूह रास, और उसी रास का ये महा महोत्सव चल रहा है ……दो दो गोपियों के मध्य में श्याम सुन्दर हैं …पर उन दो गोपियों को भी ऐसा लग रहा है कि …मेरे ही साथ श्याम हैं ।

किसी गोपी को चूमते हैं श्याम सुन्दर ……….तो वह समाधिस्थ सी जाती है ……..वह कुछ देर के लिये स्वयं को भी भूल जाती है ।

कोई गोपी नाचते हुये आती है श्याम सुन्दर के पास …..तो श्याम सुन्दर अपनें मुख का बीरा उसके मुख में दे देते हैं ।

कोई गोपी इतनी मग्न हो जाती है उस महारास में कि …….वो ठहर, कुछ आलाप लेती है ……..उसके सुमधुर आलाप को सुनकर श्याम सुन्दर उसकी ठोढ़ी पकड़ कर बड़े प्रेम से हिलाते हैं ।

कोई गोपी बस श्याम सुन्दर पर ही त्राटक कर रही है …..श्याम सुन्दर उसके पास जाते हैं ……और अपनी सुरभित साँस उनके नेत्रों में छोड़ते हैं …….वो खिलखिलाते हुये श्याम सुन्दर को अपनें बाहु में भर लेती है, उन श्याम कपोलों को चूम लेती है …………

एक ताल, एक स्वर में दिव्यातिदिव्य महारास यमुना पुलिन में चल रहा है ………….इस महारास के कारण पृथ्वी अपनें आपको धन्य समझ रही है …………आहा !

कैसे लग रहे हैं श्यामसुन्दर ? विदुर जी जानना चाहते हैं ।

उद्धव बोले – तात ! चारों ओर गोपियाँ हैं ………और वो सब गोपियाँ ऐसी लग रही हैं …….जैसे स्वर्ण मणि बिखर दी गयी हों……..और श्याम सुन्दर ऐसे लग रहे हैं ……जैसे नीलमणी मध्य में हो …….तात ! नेत्र बन्दकर के इस महारास का ध्यान करो ………चारों ओर स्वर्ण मणि अनन्त संख्या में चमक रही हैं उस रात्रि में …..और मध्य में मरकत मणि …….जो नीले रंग की होती है ……….अद्भुत ! रस बिखर गया है इस वृन्दावन में ……….और वही रस जब प्रगाढ़ हो गया ………..तब रास बन गया …………महारास बन गया ।

विमानों में देवों की स्थिति देखनें जैसी है ………और उनकी पत्नियों की तो और भी विचित्र है……….वो विमान में ही गिर पड़ीं हैं ……श्यामसुन्दर का ये विश्व मनमोहक रूप देखकर …………उनके केश बिखर गए हैं …………वस्त्र अस्तव्यस्त हो गए हैं……….उनकी लम्बी लम्बी साँस चल रही है ।

तब नभ से उतरीं महालक्ष्मी ………………

*क्रमशः….

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