श्रीकृष्णचरितामृतम्
!! अजगर नें जब नन्दबाबा को निगला…!!
भाग 1
शिवाय नमः ॐ, शिवाय नमः ॐ , शिवाय नमः ॐ ……..
शिवरात्रि को जागरण ही होता है……महादेव की उपासना करते हुये सब उपासक जागरण करते हैं उस समय मन्त्र जाप या ध्यान जो रूचि हो, वही उपासक करता है ।
रुद्राभिषेक पूर्ण हो गया था……श्याम सुन्दर और श्रीराधारानी नें मिलकर रुद्राभिषेक किया था !
अब सब बृजवासी जन नेत्र बन्दकर के बैठे थे…..और तन्त्र पद्धति से सब इसी मन्त्र शिवाय नमः शिवाय नमः का जाप कर रहे थे ।
तभी – नन्द बाबा को प्यास लगी…….वो किसी को बिना बताये पीछे से उठ गए और सरस्वती नदी में पहुँच गए थे……..
अम्बिका वन एक घोर अरण्य था…..शिव शक्ति का यहाँ वास था ।
तात ! जल पीकर नन्दबाबा जब शिवालय की ओर लौट रहे थे ……तभी एक भयानक अजगर नें बृजराज को देख लिया ।
बृजराज को कुछ पता नही हैं….वो भाव भक्ति में इस समय डूबे हुए थे ।
सामनें शिवालय था …….जहाँ समस्त बृजवासी मन्त्र जाप कर रहे थे……..और अपनें में ही लीन थे ।
अजगर सरकता हुआ आया……वो बहुत बड़ा और विशाल था क्षण भी नही लगे होंगे …….बृजराज को उस अजगर नें निगल लिया ……..पूरा नही पर आधा शरीर अजगर के मुख में चला गया था ।
बचाओ ! बचाओ ! बचाओ ! चिल्लाये नन्दबाबा ।
कुछ बृजवासियों नें सुन लिया…….दूर थे वो सब……उन्हें लगा कोई बुला रहा है……..वो ऐसे ही सहजता में उठे और देखनें के लिये शिवालय से बाहर आगये थे…….पर जैसे ही उन्होंने देखा …..अजगर हमारे बृजराज को निगल रहा है…….वो दौड़े, फरसा कुल्हाड़ी सब लेकर दौड़े……सबसे पहले तो अजगर को काट दिया……..पर विचित्र था वो अजगर भी……..आधा कटनें पर भी वो बृजराज को छोड़ नही रहा था……..अब तो दस बृजवासी अजगर के पूँछ की ओर लगे……और दस नन्दबाबा को पकड़कर खींचनें लगे अजगर के मुख से……..पर बृजराज नही निकल पाये ।
तभी नन्द बाबा नें देखा ……..नेत्र बन्दकर के ध्यान में लीन हैं श्रीकृष्ण !
बस, हे कृष्ण ! ओ लाला ! कन्हैया ! मुझे बचा ! ये अजगर तेरे पिता को निगल रहा है……आर्त पुकार थी नन्दबाबा की ।
*क्रमशः ….


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