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August 30, 2025 5:09 am

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श्रीकृष्णचरितामृतम्-! यशोदा के हृदय में बज्रपात !!-भाग 1: Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्-! यशोदा के हृदय में बज्रपात !!-भाग 1: Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्

!! यशोदा के हृदय में बज्रपात !!

भाग 1

मैया ! मैया !

रात्रि में नन्दभवन में पहुँचे थे कन्हैया अपनी श्रीराधा से मिलकर ।

मेरा लाला आगया ये देखते ही मैया नें अपनें आँसू पोंछ लिए …..और कपाट खोलनें गयीं ।

राधा से मिल आया ? मैया यशोदा नें पूछा ।

हाँ, बस इतना ही कहा कन्हैया नें ………….

मैया ! तू सोई नही है ? हँसी ये सुनकर मैया ………फिर बिना कुछ बोले …….अपनें लाला को ले गयीं ……….पलंग में सुला दिया ।

सो जा तू ! मैया ! तू भी सोजा ना ! अपनी मैया का पल्लू पकड़ लिया था ………..ठीक है ………मैया वापस आगयी और सिर में हाथ फेरनें लगी लाल के……..आँखें बन्द कर लीं थीं कन्हैया नें ।

थपथपी देती रहीं ………उस मुखचन्द्र को निहारती रहीं जिसे देखे बिना इनका जी नही लगता था ………..पर कल से ? फिर हृदय चीत्कार उठा ……कल ? ये यहाँ नही होगा ? ओह ! फिर हिलकियाँ फूट पड़ी ………अश्रुओं की धार बह चली ………..इतना ही होता तो भी कोई बात नही थी ………अश्रुओं को तो पोंछा जा सकता था …….पर वो हृदय की चीख ? वो बाहर आरही थी ।

मैया को उठना ही पड़ा ……..न उठती तो उसका लाला रुदन सुनकर उठ जाता …….अपनें मुँह में साड़ी का पल्लू दवाये वो भागी वहाँ से ।

घड़ी भर ही बीता होगा …..सुबुकनें की आवाज कन्हाई के कानों में –

उठ गए थे कन्हाई……इधर उधर देखा, मैया नही हैं पास में …..एक दो बार आवाज भी लगाई , मैया , मैया ! पर कोई उत्तर नही मिला …….

कुछ देर रुक कर सुननें की कोशिश करते रहे कन्हाई ……..कि ये सुबुकनें की आवाज किधर से आरही है ………….जिधर से आरही थी अब उस ओर ही बढ़े ……………..

ओह ! मैया एक कोने में बैठी है …….कन्हैया नें देखा……..और साड़ी का पल्लू मुँह में ठूस के हिलकियों से रो रही है ।

कन्हैया से ये कैसे देखा जाता ……………वो स्तब्ध से खड़े रहे ………मेरी मैया ! फिर दौड़कर पास में जाकर बोले …..ये क्या है मैया ! ये सब क्या है ?

कुछ नही ……कुछ भी तो नही ……..तू सोया नही ? साड़ी का पल्लू मुँह से हटाकर तुरन्त आँसुओं को पोंछकर – मेरे लाला ! कुछ नही है ।

तू रो रही है ! तू क्यों रो रही है मैया ? कन्हैया नें ये क्या पूछा ।

हंसी मैया ……….उसकी हंसी आज !……..

तू जा रहा है कल ……….मैं रोऊँ भी नही ? तू मेरा सब कुछ है ……..मेरा लाला ! मेरा कन्हैया ! मेरा कान्हा ! तू चला जाएगा ……सोचा है तेनें तेरी ये बुढ़िया मैया कैसे रहेगी ? मैं तेरे बिना कैसे जीयूँगी ? तू ही मेरा सब कुछ है ………वो चीख उठीं !

कुछ देर के लिये कन्हैया कुछ नही बोले …….वो बोल ही नही सके ।

*क्रमशः…

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