श्रीकृष्णचरितामृतम्
!! इधर मैया यशोदा – “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 16” !!
भाग 1
इधर मैया यशोदा ………
आज प्रातः से ही हँसी जा रही हैं मैया ……..इनकी हँसी …….
अत्यन्त दुःख वेदना में हँसना …….कैसा लगता है !
मैया यशोदा कभी जोर से हँसी नहीं …….मुस्कुराती थीं …….कभी कभार अपनें लाला की चंचला पर हँस पडीं तो वो हँसी चाँदी की घण्टी की तरह गूँजती थी……अत्यन्त मधुर …….इसलिये तो लाला कभी कभी गुदगुदी कर देता था अपनी मैया की हँसी सुननें के लिए ……..तब ये हँसती थीं ।
आज हँसे जा रही हैं ……..
बृजरानी जू ! क्यों हँस रही हो ? एक गोपी आकर पूछती है ।
अरे ! अपना कन्हैया दूल्हा बन गया है…….माथे में सेहरा सजाये दूल्हा…..रोहिणी नें एक दूत भेजा था…….उसी नें ये सूचना दी …..ये पत्र दे गया है……कह रहा था इस में सब बातें विस्तार से लिखीं हैं……अब बृजराज आएंगे खिरक से तो उनसे पढ़वाऊँगी ।
क्या नाम है बहू का ?
वो गोपी भी वहीं बैठ गयी और मैया से पूछनें लगी थी ।
रुक्मणी ………यही नाम बोल रहा था वो दूत !
रुक्मणी ! अच्छा नाम है ना ? यशोदा जी पूछती हैं उस गोपी से ।
हाँ , नाम तो अच्छा है ………..कैसी है दीखनें में ?
अब मैने तो देखा नही है ……….पर दूत कह रहा था गोरी है ।
देख ! मैं तुझे दिखाती हूँ ………उस गोपी का हाथ पकड़ कर मैया उठती हैं ……….अपनें महल में जातीं हैं ……….एक सन्दूक खोलती हैं …….ये देख ! मैने अपनें लाला के व्याह के लिये बनाया था …….वो ये सेहरा बाँधता……..मैने बड़े प्रेम से बनवाया था …….पर !
अब तो अश्रु बहनें शुरू हो गए थे मैया के ……और वो शून्य में खोंनें लगीं थीं ।
“व्याह करेगा व्याह करेगा ,
मेरा गोपाल व्याह करेगा !
दूल्हा बनेगा दूल्हा बनेगा , मेरा गोपाल दूल्हा बनेगा !”
मैया यशोदा गानें लगीं थीं ………व्याह के गीत ।
हंस भी रही हैं ……और नयनों से अश्रु भी बह रहे हैं ………..
“साध मेरी जीवन की पूरा करेगा , मेरा गोपाल व्याह करेगा” ।
उफ़ ! और अब नाचनें भी लगीं थीं मैया यशोदा ।
क्रमशः ….
शेष चरित्र कल –
