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August 30, 2025 6:41 am

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श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! मित्रविन्दा स्वयम्वर- “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 25” !!-भाग 1 : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! मित्रविन्दा स्वयम्वर- “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 25” !!-भाग 1 : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्

!! मित्रविन्दा स्वयम्वर- “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 25” !!

भाग 1

निमन्त्रण आया है उज्जैन से …..भूआ जी का …..उनकी पुत्री का स्वयंवर है…….श्रीकृष्ण नें आज अपनी रानियों से कहा ।

वहाँ जाना आवश्यक है …..क्यों की उज्जैन में विद्याध्यन करते हुए भूआ जी के यहाँ हम जा नही पाये थे …….महर्षि सान्दीपनि के गुरुकुल का नियम पक्का था …….गुरुकुल के छात्र किसी से मिल नही सकते थे न जा सकते थे । मथुरा लौटते समय व्यस्तता इतनी थी कि उस समय भी जाना न हुआ ……. राजाधिदेवी यही भूआ जी का नाम है उज्जैन की राजमाता हैं ।

…श्रीकृष्ण नें अपनी यात्रा की सूचना अपनी रानियों को दी और अपनें बड़े भाई के साथ उज्जैन के लिये निकल पड़े थे ।


नारायण का अवतार हैं श्रीकृष्ण ……..बड़ा सुन्दर श्याम घन, उसकी मधुर मुस्कान……..कौन मोहित नही होता उससे…….पता है पुत्री ! बृज में तो नर नारी की कौन कहे पशु पक्षी भी पागल थे उसके पीछे ।

राजाधिदेवी अपनी पुत्री मित्रविन्दा को बचपन से श्रीकृष्ण के बारे में बतातीं ………छोटी थी तब मित्रविन्दा ।

पर अब तो युवा हो गयी है …..माँ ! उनके बारे में बताओ ना ! अभी भी इसके श्रवण का विषय श्रीकृष्ण ही हैं ………..तेरा स्वयंवर होनें वाला है ……….कुछ उसके बारे में भी सोच …….माता राजाधिदेवी मित्रविन्दा से कहतीं ………..छोडो ना माँ ! उनके बारे बताओ ……..अच्छा ! माँ ! वो आएंगे ना मेरे स्वयंवर में ? हाँ , हाँ क्यों नही आएगा ……..मैने सूचना भिजवाई है ………..और रोष प्रकट भी किया है कि महर्षि सान्दीपनि के यहाँ विद्याध्यन करते समय तो नही आये …….कोई बात नही पर इस बार नही आओगे तो मैं कभी बात नही करूंगी !

अगर नही आये तो ? मित्रविन्दा पूछती है ।

आएगा, मेरा वासुदेव अवश्य आएगा …..उसे भूआ का रिस पता है …..मैं जीवन भर उससे बोलूंगी नहीं …..माता राजाधिदेवी नें कहा ।

हाँ, अगर वो नही आये तो …………शून्य में खो जाती मित्रविन्दा …….

आएगा अवश्य आएगा ……….क्यों नही आएगा ……मित्रविन्दा के सिर में हाथ रखते हुये कह रही थीं उसकी माता ।

मधुर स्वप्न देख रही थी मित्रविन्दा, श्रीकृष्ण को अपनें पति के रूप में देख रही थी…. स्वप्न में खो जाती ……..राजाधिदेवी इस बात से पूर्ण अनभिज्ञ थीं ।


स्वयंवर प्रारम्भ होनें वाला है…………सब देश विदेश के राजा महाराजा आ चुके हैं ……..दुर्योधन, दुःसासन आदि विशेष आये हैं ……बाकी शताधिक राजा और आये …स्वयंवर है …….तो राजा तो आनें ही थे ।

पर श्रीकृष्ण अभी तक क्यों नही आये ………….राजाधिदेवी पूछ रही हैं अपनें मंत्रियों से …….पर वो क्या उत्तर दें ।

माँ ! वो क्यों नही आये ! मित्रविन्दा को उसकी सखियाँ सजा रही हैं ….पर सजनें में उसकी कोई रूचि नही है …….वो क्यों नही आये !

क्रमशः ….
शेष चरित्र कल –

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