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August 30, 2025 12:35 pm

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કેતન પટેલ પ્રમુખ ए ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસપ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિ, દમણ અને દીવ દ્વારા ૨૫/૦૮/૨૦૨૫ ના રોજ પ્રફુલભાઈ પટેલને પત્ર લખ્યો છે દમણ જિલ્લાને મહાનગર પાલિકામાં અપગ્રેડ કરવાનો પ્રસ્તાવ

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श्रीकृष्णचरितामृतम्-!!महारानी नाग्नजिती – “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 26” !!-भाग 2 Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्-!!महारानी नाग्नजिती – “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 26” !!-भाग 2 Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्

!! महारानी नाग्नजिती – “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 26” !!

भाग 2

ओह ! ये पीताम्बरधारी !

…..कौशल पुर वासियों नें आज श्रीकृष्ण को देखा …..तो आनन्दित हो उठे ….किन्तु …..इन सुकोमल शरीर वालों को क्यों भेजा जा रहा है इन खूंखार बृषभों के पास ।…..मन में कष्ट भी हो रहा था ।

बड़े बड़े वीर नही नथ पाये इन बृषभों को …..तो ये सुकोमल देह वाले क्या करेंगे !

इनको मत जानें दो भीतर……..बूढे बड़े सब बोल रहे थे ।

इनको ही वर माला डाल दे ना अपनी राजकुमारी……..कितनें सुन्दर हैं ये ……..अपनें राजा को भी पता नही क्या सनक है ……..ओह ! नारियाँ कह रही थीं ।

महारानी नें अपनें पति राजा नग्नजित से पूछा ………..कौन हैं ये ?

नाग्नजिती नें अपनी सखियों से पूछा ………कौन हैं ये सुन्दरतम ?

द्वारिका के राजा हैं ………और दूसरे इनके सखा हैं ।

आज ही आये हैं …..और प्रतिज्ञा सुनकर ही आये हैं ।

मेरे पिता को कोई कह दो न कि अपनी प्रतिज्ञा वो तोड़ दें ……..राजकुमारी अपनी सखियों से कह रही है ।

तुम जानती नही हो क्या अपनें पिता को ………प्राण चले जाएँ पर वचन से पीछे हटना इन्होनें सीखा कहाँ है ?

इन्हीं चर्चाओं के मध्य श्रीकृष्ण उस क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे …जहाँ वो बृषभ खड़े थे …………सब शान्त होकर देख रहे हैं ……….राजकुमारी की साँस तो अटक ही गयी थी …..ओह ! ये पीताम्बर धारी …..इन्हें कुछ हो न जाए …………..पर ये क्या मध्य में मुस्कुराते हुये श्रीकृष्ण राजकुमारी को देखनें लगे थे ………….तभी पीछे से एक बृषभ आया ……सारी प्रजा चिल्ला उठी ………..पीछे देखो ……श्रीकृष्ण उछल कर दूसरी ओर जाकर खड़े हो गए …..वो बृषभ गिरा ……….दूसरा फिर आया …………श्रीकृष्ण वहाँ से भी हट गए ……….वो भी टकराया सामने की बाड़ से ………..चौथे के सींग पर लटक गए थे श्रीकृष्ण ….वो सामनें के कँटीले बाड़ में श्री कृष्ण को ले जाकर टक्कर मारने वाला ही था कि श्रीकृष्ण उलटे उछल कर दूर जा खड़े हुए …………….

आम जन मानस की क्या राजकुमारी और महारानी सबकी साँसे अटक गयीं थीं ………सब प्रार्थना करनें लगे थे इन्हें कुछ हो न जाए ।

ओह ! थका दिया सब बैलों को श्रीकृष्ण नें …………..और अब एक रज्जु लेकर एक दो तीन …….लगातार सातों के नाक में रज्जु डालकर नथ दिया ………….क्या दिव्य छबि थी उस समय श्रीकृष्ण की …….

मध्य में खड़े होकर नाग्नजिती को फिर निहार रहे थे ।

प्रजा नें आनन्दित होकर करतल ध्वनि की ………..राजा नें स्वयं खड़े होकर पुष्प बरसाया ।

नाग्नजिती हाथों में वर माला लिये ……सखियों के साथ चल दी थीं ।

अर्जुन आनन्दित हो उठे थे अपनें श्रीकृष्ण की ये लीला देखकर …..वो स्वयं करतल ध्वनि किये ही जा रहे थे ।

नाग्नजिती नें वरमाला श्रीकृष्ण के गले में डाल दी ………आनन्द सिन्धु उमड़ पड़ा था कौशल देश में ……….पर इसकी गूँज द्वारिका में भी पहुँची …….महारानी नाग्नजिती अब द्वारिका आरही हैं …….लोगों में ये चर्चा का विषय बन गया था ।

शेष चरित्र कल –

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