कौन हैं पिंगली वेंकैया? जिनकी वजह से हमें मिला तिरंगा, जानिए उस शख्स की अनसुनी कहानी
महान स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने देश का तिरंगा डिजाइन करने पहले दुनियाभर के कई देशों के राष्ट्रीय ध्वज का अध्ययन किया. सालों की मेहनत के बाद उन्होंने महात्मा गांधी को राष्ट्रीय ध्वज का पहला डिजाइन दिखाया.
1- पिंगली वेंकैया का जन्म 2 अगस्त 1876 को, ब्रिटिश भारत के भाटलापेनुमारु, मद्रास प्रेसीडेंसी में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था। मद्रास से अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए।
2- बेहद कम लोग जानते हैं कि युवावस्था में वेंकैया ने साउथ अफ्रीका जाकर दूसरे बोअर युद्ध में ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सैनिक के रूप में भूमिका अदा की। अगर बात राष्ट्रीयता की भावना की हो तो साउथ अफ्रीका ब्रिटिश सैनिकों के बीच यूनियन जैक द्वारा राष्ट्रीयता की भावना को देखकर वे भी प्रेरित हुए।
3- उन्हें पट्टी वेंकैया के नाम से भी जाना जाता था क्योंकि उन्होंने कंबोडिया कपास में रिसर्च की थी। पट्टी का अर्थ है ‘कपास’ जो मछलीपट्टनम के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।
4- भाषाओं के प्रति उनके प्रेम ने भी लोगों का ध्यान खींचा। पिंगली ‘जापान वेंकैया’ के रूप में भी प्रसिद्ध थे क्योंकि 1913 में उन्होंने आंध्र प्रदेश के एक कस्बे, बापटला के एक स्कूल में जापानी भाषा में एक पूर्ण व्याख्यान दिया।
5 – एंग्लो-बोअर युद्ध में हिस्सा लिया और उसी दौरान उनकी महात्मा गांधी से मुलाकात हुई।
महात्मा गांधी से हुई इस मुलाकात के बाद पिंगली में बदलाव आया और उस स्वदेश वापस आ गए। फिर वह स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए। उन्होंने ब्रिटिशों के खिलाफ आवाज उठाते हुए स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। वहीं भारत लौटने के बाद उन्होंने देश के लिए एक राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण के लिए खुद को समर्पित कर दिया।
6- 1916 में पिंगली वेंकैया ने एक ऐसे झंडे के बारे में सोचा जो सभी भारतवासियों को एक धागे में पिरोकर रखें। उनकी इस पहल को एस.बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी का साथ मिला और इन तीनों ने मिल कर “नेशनल फ्लैग मिशन” की स्थापना की।
7- राष्ट्रीय ध्वज के लिए वेंकैया के डिजाइन को 1921 में अनुमोदित किया गया था। ध्वज का अनुमोदन विजयवाड़ा में कांग्रेस की बैठक में महात्मा गांधी द्वारा किया गया।
8- वेंकैया ने 4 जुलाई 1963 को गरीबी में अंतिम सांस ली। नायडू ने एक बार कहा था कि वेंकैया हमारे स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायक थे जिन्होंने बहुत बड़ा योगदान दिया।
9- यह केवल 2009 में था, कि उन्हें इतिहास से बाहर कर दिया गया था और उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया गया था।
10- पिछले साल, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी द्वारा भारत रत्न के लिए उनके नाम का प्रस्ताव भी किया गया था।


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