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August 30, 2025 6:39 am

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श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! जीजी ! बृज में दाऊ आरहा है – “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 37” !!-भाग 1 : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! जीजी ! बृज में दाऊ आरहा है – “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 37” !!-भाग 1 : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्

!! जीजी ! बृज में दाऊ आरहा है – “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 37” !!

भाग 1

जीजी ! रोहिणी का प्रणाम !

सब कुशल होंगें ! यहाँ भी द्वारिका में कुशल ही हैं ।

दो दिन बाद दाऊ बृज में आरहा है ……….ये बात मुझे स्वयं उसनें ही बताई …….मैं बहुत प्रसन्न हुयी ……..मैं आज सच में हृदय से प्रसन्न हूँ ……दाऊ नें मुझ से कहा भी……माँ ! आप भी चलो बृज वृन्दावन ……पर मैने इच्छा होते हुए भी मना कर दिया ……..क्या करूँ जीजी ! स्त्री जात स्वतन्त्र कब रही है !

छोडो जीजी ! ये सब बातें तो होती रहेंगी ………रोना धोना तो लगा ही रहेगा …….कोई बात नही ………..अब सुनो अपनें लाला के बारे में …….लाला के लाला के भी लाला हो गया है ……..हाँ जीजी ! प्रद्युम्न का पुत्र “अनिरूद्ध” है , पर सब अपनें पिता और दादा पर ही गए हैं ………हंसी आती है मुझे तो ।

जीजी ! हाँ, मैं मुख्य बात बताना तो भूल ही गयी ……तुम सोलह हजार एक सौ आठ बहुओं की सास हो गयी हो…….जब मिलोगी ना तब ये सब तुम्हारे पांव दवायेंगी…..बहुत विवाह हो गए हैं न लाला के !

जीजी ! और लीला सुनो अपनें लाला की …….प्रत्येक रानी में से दस दस पुत्र और एक एक पुत्री का जन्म हुआ है ……….अब आप मनसुख से हिसाब लगवा लेना कि तुम्हारे कितनें पोता और पोती हो गए हैं ।


आज खूब हंस रही हैं यशोदा मैया ………उनकी हंसी रुक ही नही रही ……..वर्षों बीत गए जब से कन्हैया गया है इस बृज को छोड़कर यहाँ हंसा कौन ? पर आज पत्र सुनाते हुये मनसुख भी हंस रहा था और मैया यशोदा भी…………

मनसुख ! सुन ना ! सोलह हजार एक सौ आठ में प्रत्येक में से दस दस पुत्र और एक एक पुत्री कितनें हुए ? मैया यशोदा पूछ रही हैं …..

बहुत हुये …….मनसुख नें कहा और आगे पत्र पढ़नें लगा ।

मनसुख ! अभी पत्र मत पढ़ पहले बता ना ! कितनें हुए ?

अब मनसुख हिसाब करनें बैठा………”एक लाख सतत्तर हजार एक सौ अट्ठासी”………जैसे तैसे हिसाब करके मनसुख नें मैया यशोदा को बताया ……मैया यशोदा हंसती रहीं……खूब हंसती रहीं ।

अब आगे सुनाऊँ ? मनसुख को अपनें सखा का पत्र पढ़नें में आनन्द आरहा है ।

हाँ , सुना…नन्दबाबा नें कहा…और फिर मनसुख पत्र सुनानें लगा था ।

क्रमशः ….
शेष चरित्र कल –

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