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August 30, 2025 12:29 pm

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કેતન પટેલ પ્રમુખ ए ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસપ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિ, દમણ અને દીવ દ્વારા ૨૫/૦૮/૨૦૨૫ ના રોજ પ્રફુલભાઈ પટેલને પત્ર લખ્યો છે દમણ જિલ્લાને મહાનગર પાલિકામાં અપગ્રેડ કરવાનો પ્રસ્તાવ

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श्री महाभारत कथा – समीक्षा – : Kusuma Giridhar

श्री महाभारत कथा – समीक्षा – : Kusuma Giridhar

जय श्री राधे राधे जी।
🙏🌹🙏🌹🙏❤️
पोस्ट ( 524 ) अथ श्री महाभारत कथा – समीक्षा -( १२४ )- युधिष्ठिर के अश्वमेध यज्ञ मे शंख क्यों नही
बजा ??
🚫 महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद , धर्मराज युधिष्ठिर ने एक बहुत बड़ा अश्वमेध यज्ञ किया ~इसमें बहुत अधिक ऋषि, महर्षि, विद्वान् ब्राह्मण , आदि पधारे । इसमें श्री कृष्ण भगवान् ने एक शंख को स्थापित किया और कहा कि यज्ञ के पूरी तरह विधिपूर्वक सम्पूर्ण होने पर यह शंख बिना बजाये स्वयं बजेगा ।
🍅 यज्ञ की शास्त्रोक्त पूर्णाहुति ,तर्पण ,ब्राह्मण भोज, दान दक्षिणा ,-सभी कार्य विधि पूर्वक संपन्न हो गए ; परंतु वह शंख नही बजा !

  🌰 चिंतित पांडवो द्वारा -श्री कृष्ण से इसका कारण पूछने पर -श्री कृष्ण ने कहा~ एक  #सर्वश्रेष्ठ  #रसिक #वैष्णव  #संत ने अभी तक भोजन नही किया है इसीलिए यज्ञ पूर्ण नही हुआ है और शंख नही बजा-
  युधिष्ठिर ने पूछा  ~जब  सभी परम सिद्ध महर्षि विद्वान भोजन कर चुके है तो  अब  कौन श्रेष्ठ वैष्णव भक्त बचा  ??
 श्री कृष्ण ने कहा ~वे उसे ही  सर्व श्रेष्ठ भक्त  मानते है ~
    🎈 1~जिसे अपनी जाति , विद्या , ज्ञान , आदि का अहंकार बिल्कुल न हो  और ~
    🎈 2~जो अपने को दासो का दास मानता हो ~वे ऐसे परम भक्त को जानते है ~अगर यज्ञ पूर्ण करने की इच्छा हो तो उसे भोजन कराइये  !

  🍟 युधिष्ठिर ने कहा ऐसा भक्त जिसमे अहंकार की गंध न हो , को तलाश करने दूसरे लोक जाना पड़ेगा~श्री कृष्ण ने  बताया कि वह इसी नगर में रहता है और दिन रात -सुबह शाम -तुम्हारे यहाँ आता जाता है परंतु उसे कोई जानता  नहीं  है और न ही वह स्वयं अपने को प्रगट करता है !!!

भगवान श्री कृष्ण ने किसका  नाम व् पता बताया ~~आप सब सुन कर चौंक जाएंगे ~
 जाति पाँति पूछे नहि कोई - हरि को  भजै सो हरि का होई ------

  🚫   तब उस भक्त का  पता बताते हुए  भगवान श्री कृष्ण बोले -- आपका  " स्वपच (सफाई कर्मचारी )

भक्त” बाल्मीक” ही सर्व हितकारी सच्चे साधू है जिनमे अहंकार की गंध भी नही है “

  🍅🎃 भगवान् के आदेश के अनुसार -अर्जुन और भीमसेन ने भक्त बाल्मीक के घर पंहुच कर ~भक्त के चारो ओर घूमकर  उसकी प्रदक्षिणा की और फिर आनंद से झूमते हुए पृथ्वी पर लेटकर उसको प्रणाम किया -और उनसे निवेदन किया कि कल हमारे यहाँ पधार कर,  वहां अपनी झूठन गिराकर उनके  पाप ग्रहो को दूर करे और  उन्हें भाग्यशाली बनाये ।

  🍱 भक्त बाल्मीक -लज्जा और संकोच से कांपने लगे और बोले कि वे तो सदा राजपरिवार की झूठन उठाते है और द्वार पर झाड़ू लगाते है -फिर  निमंत्रण कैसा ??
  🚫 फिर अगले दिन श्री कृष्ण ने द्रोपदी से तमाम मेल के व्यंजनों सहित बहुत सुन्दर रसोई बनवायी -राजा युधिष्ठिर स्वयं जाकर बाल्मीक भक्त को लिवा लाये और श्री कृष्ण के आदेश पर उसे सादर गोद में उठाकर  रसोईघर में ले गए । भक्त द्वारा   भोजन प्रारम्भ करते ही शंख बज उठा परंतु तुरंत ही बजना बंद हो गया ।

भगवान् ने शंख को एक छड़ी लगायी और न बजने का कारण पूछा ~शंख ने कहा द्रोपदी से पूछो

 🍎🎆~द्रोपदी ने बताया कि सुंदर व अति स्वादिष्ट  विभिन्न प्रकार के  मिष्ठानों और   नमकीन व्यंजनों को---  भक्त बाल्मीक द्वारा  सभी को  - एक में मसलकर  खाते देखकर~~ उसके मन में उसकी अपनी श्रेष्ठ  पाक विद्या का अनादर होते देखकर   विचार आया कि -आखिर यह भक्त बाल्मीक  स्वपच जाति के ही तो  है-  ये राजकीय  व्यंजनों को खाना क्या जाने ? -भक्त के बारे में यह विचार आते ही शंख ने बजना बंद कर दिया ।

 🌰 श्री कृष्ण द्वारा " भक्त बाल्मीक " से इस प्रकार  खाने का कारण पूछने पर उसने जबाब दिया  कि वह भगवान् का भोग लगाकर  प्रसाद मानकर भोजन कर रहा है । व्यंजनों का स्वाद तो प्रभु ने पहले ही पा लिया~

  🚫   अब उसके मन में   व्यंजनों के विभिन्न  स्वादो  की बात मन में न आए ~  इसीलिए सभी को मिलाकर प्रसाद बना कर खा रहा है ! यह सुनकर द्रोपदी भक्त बाल्मीक के प्रभु भक्ति भाव   के प्रति अपार सद्भाव से  भर  गयी ~ उसके पश्चाताप , भक्त के प्रति श्रद्धा भाव से परिपूर्ण होते ही ~~  तुरंत ही  #शंख #जोरो से  #बजने लगा ~~-युधिष्ठिर का महायज्ञ सम्पूर्ण हुआ ।

   🚫🌏 इसी कारण आज भी वृन्दावन   में  प्रभु को समर्पित 56 मेल के व्यंजनों को  ,एक में ही मसल कर प्रसाद रूप में सभी को वितरित किया जाता है ~इस प्रसाद का स्वाद अवर्णनीय होता है ।

 🍎  इस प्रकार  भगवान श्री कृष्ण  ने  जहा एक ओर ~विशाल यज्ञ से सारे विश्व के राजाओ , विद्वानों ,ऋषियो द्वारा   सम्मानित -पांडवो के अपने को ""सर्वपूज्य""और   " सर्वोपरि भक्त " होने  

का #अभिमान का #नाश किया – वही अपने सच्चे भक्त -भले ही वह कितनी भी नीची जाति से हो -उसको #सर्वोपरि #सम्मान #दिलाया ।श्री राम जी ने भी कहा है–

    🚫 पुरुष  ,नपुंसक ,  नारि  वा-  जीव   चराचर  कोई ।
   ......सर्व भाव भजि ,कपट तजि , मोहि परम प्रिय सोई ।।   उत्तर काण्ड ~~दोहा  87 (क)

    🍎 स्वपच   जाति  के बाल्मीक सफाई कर्मचारी को भक्त होने के कारण ~अर्जुन भीमसेन और चक्रवर्ती  राजा युधिष्ठिर ने इतना   #अकल्पनीय  #सम्मान दिया ~~

🌐🍎जातिवाद के कारण हिन्दुओ को बदनाम करने वालो देखो ~प्राचीन भारत में कहा था जातिवाद ~
महाभारत कथा — यहाँ हम कल्याण भक्तमाल अंक 2013 के पेज न 95 / 96 से ले रहे है।
. ~~~~~ क्रमशः राम नाथ गुप्त ****

जय श्री कृष्ण जी।
🙏🌹🙏🌹🙏🇮🇳

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