श्रीकृष्णचरितामृतम्
!! “भगवान बलभद्र का स्वधाम गमन” – उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 92 !!
भाग 2
नाथ ! बलराम जी को साम्ब मारने के लिए दौड़ा है ।
दारुक ने बिलखते हुए भगवान को सूचना दी ।
इस सूचना को पाते ही भगवान श्रीकृष्ण उठ गए …..और तेज चाल से चलते हुए कुटिया से बाहर आगये थे ।
पीपल का वृक्ष था पास में ही …..उस तक गए और वहीं बैठ गए ……अर्जुन और दारुक को वहाँ से ये कहकर हटा दिया …….मुझे एकान्त दे दो ।
बलराम जी ने दूर से देखा भगवानश्रीकृष्ण को ……भगवान शान्त भाव से बैठे हुए हैं और अपने प्रिय “अनन्त शेष” को देख रहे हैं ।
बलराम जी ने एकटक देखा भगवान श्रीकृष्ण को ….फिर हाथ जोड़कर वहीं से प्रणाम किया ।
“लीला में कोई अपराध बन गया हो तो क्षमाप्रार्थी हूँ”…….बलभद्र ने मन ही मन कहा ।
रामावतार में लघु भ्राता बनाया मुझे और इस कृष्णावतार में ज्येष्ठ भ्राता …..हे नाथ ! लीला में अपराध बन ही गया होगा …..फिर एक बार बलभद्र जी ने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रणाम किया । मैं जा रहा हूँ ….आपकी शैया भी तो मैं ही हूँ ।
भगवान श्रीकृष्ण बस बलभद्र जी को देखते रहे ….न निकट गए ….न उन्हें कुछ कहा ।
नेत्र बन्द कर लिए भगवान अनन्त ने …….समुद्र सामने था …….देखते ही देखते उनके मुखारविंद से शेष नाग प्रकट हुए …….और वो शेष , अनन्त जल राशि में प्रवेश कर गए थे ।
“भगवान बलभद्र की जय जय जय”……नभ से देव लोग यही जयकारा लगा रहे थे ।
शेष चरित्र कल –


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