!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 4 !! – बृजमण्डल देश दिखाओ रसिया !-भाग 2 : Niru Ashra

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!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 4 !!

बृजमण्डल देश दिखाओ रसिया !

भाग 2

और इनकी प्रार्थना है कि बृहत्सानुपुर ( बरसाना ) के आस पास ही हमें स्थान दिया जाए………तभी हमें भी आल्हादिनी का कृपा प्रसाद प्राप्त होता रहेगा …….नही तो पापियों के पापों को धोते धोते ही हम उस प्रेमानन्द से भी वंचित ही रहेंगें …..जो अब बृज की गलियों में बहनें वाला है ।

उच्च स्वर से , जगत का मंगल करनें वाली ……….युगल महामन्त्र का सब गान करनें लगे थे ।

मुस्कुराते हुए चारों और दृष्टिपात कर रही हैं आल्हादिनी श्रीराधा रानी ।

और जिस ओर ये देख लेतीं हैं……वो देवता या कोई तीर्थ भी, धन्य हो जाता है ……और “जय हो जय हो” का उदघोष करनें लग जाता है ।

बृज मण्डल का दर्शन करना है प्यारे !

श्रीराधा रानी की इच्छा अब यही है ।

हाँ तो चलो ! मुस्कुराते हुए श्याम सुन्दर नें कहा ……..और बृज मण्डल कुछ क्षण में ही प्रकट हो गया ।

ये है बृज मण्डल ! देखो ! श्याम सुन्दर नें दिखाया ।

ये हैं यमुना ………….यमुना को देखते ही आनन्दित हो उठीं थीं। श्रीराधा रानी ………और ये गिरिराज गोवर्धन …………

और ये बृज की राजधानी मथुरा…………..दृश्य जैसे प्रकट हो रहे थे …….श्रीराधा रानी सबका दर्शन करती हैं ।

हे राधे ! ये देखो ! महाराजा सूरसेन …………इनके यहाँ पुत्र हुआ है ……….”वसुदेव” नाम है उनका ……….मेरे यही पिता बननें वाले हैं ।

हाथ जोड़कर श्रीराधा रानी नें प्रणाम किया नवजात वसुदेव को ।

और ये देखो……ये है मेरा गोकुल गाँव ………सुन्दर हैं ना !

हाँ बहुत सुन्दर है…….. श्रीराधारानी नें कहा ।

तमाल के अनेक वृक्ष हैं ……मोरछली ….कदम्ब ..नीम …पीपल…..और अनेक पुष्प की लताएँ हैं उनमें पुष्प खिले हैं ………घनें वन हैं ….मादक सुगन्ध उन वन से आरहा है ……………प्यारे ! देखो ………गोकुल में भी बधाई चल रही है ….यहाँ भी किसी का जन्म हुआ है ………श्रीराधा रानी आनन्दित हैं ।

वो हैं “पर्जन्य गोप” ये इस गाँव के मुखिया हैं ………..इनके अष्ट पुत्र हो चुके …….ये इनके नवम पुत्र हैं ……”नन्द गोप” मेरे नन्द बाबा !

मेरे बाबा ! ……..मेरे यही पिता है हे श्रीराधे !

पर आपके पिता तो वसुदेव जी ?

……पिता जन्म देनें मात्र से नही बनते ……जब तक उनका वात्सल्य पूर्ण रूप से पुत्र में बरस न जाए ……तब तक पिता , पिता नही …माता माता नही ।

नन्दबाबा ……..इनका वात्सल्य मेरे ऊपर बरसा ।

श्रीराधारानी नें तुरन्त अपना घूँघट खींच लिया था…..ससुर जी जो हैं ।

और ये देखो ! हे राधे ! ये है आपका गाँव बरसाना ……श्याम सुन्दर नें दिखाया ।

अपनी होनें वाली जन्म भूमि को श्रीराधिका जू नें प्रणाम किया ।

पर प्यारे ! यहाँ भी उत्सव चल रहा है !……..बधाई गाई जा रही हैं !

क्रमशः …
शेष चरित्र कल –

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