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August 30, 2025 7:13 am

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કેતન પટેલ પ્રમુખ ए ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસપ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિ, દમણ અને દીવ દ્વારા ૨૫/૦૮/૨૦૨૫ ના રોજ પ્રફુલભાઈ પટેલને પત્ર લખ્યો છે દમણ જિલ્લાને મહાનગર પાલિકામાં અપગ્રેડ કરવાનો પ્રસ્તાવ

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!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 50 !!-“चौं रे लंगर ! एक झाँकी होरी की भाग 3 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 50 !!-“चौं रे लंगर ! एक झाँकी होरी की भाग 3 : Niru Ashra

❣️❣️❣️❣️

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 50 !!

“चौं रे लंगर ! एक झाँकी होरी की
भाग 3

गुस्सा तो बहुत आया ……..पर कोई बात नही ………उलझनें से लाभ भी नही था ……..बहू आगे बढ़ती गयी …………

भाभी ! देवर ते घूँघट कैसो ?

बड़ी मीठी आवाज थी ………..मिश्री से भी मीठी ।

बड़ा प्यारा सा अधिकार जता दिया था ,
रसिक शेखर नें उस बाला के प्रति ।

उस वधू के मन में भी आया कि …..देखूँ तो कैसा है ये मेरा देवर ?

जैसे ही घूँघट थोड़ा सा हटाया ………बस ………..तुरन्त कन्हाई नें फेंट से गुलाल लेकर गालों में मसल दिया …….और हँसी ……..खिलखिलाती हँसी………दूर जाकर हँसनें लगे जोर जोर से ।

पर इस वधू को आश्चर्य हो रहा है ……कि मैं कहाँ मर्यादा में रहनें वाली …..कोई परपुरुष मुझे देख भी ले तो नजर झूका ले ……मैं इतनी मर्यादित ……….पर ये कौन मेरे रँग लगा गया ……और लगा भी नही गया ………..मेरे कपोल को …………उफ़ !

और आश्चर्य ये कि ……..मुझे अच्छा लग रहा है ! मुझे बुरा नही लग रहा …………मुझे क्रोध नही आरहा ।

और हे वज्रनाभ !
उस वधू के कानों में साँवरे की हँसी ही गूँज रही है ।

क्या वो गया ? देखूँ तो ! ऐसा विचार करके जैसे ही घूँघट को फिर हटाया ………………

भाभी ! मेरे गेंद तो दे जा ! ओह ! ये तो यहीं खड़ा है ।

और पीछे पड़ गया …….मैं घूँघट करके हँसनें लगी ………मुझे अपनें हँसनें पर भी आश्चर्य हो रहा था कि ये कोई लड़का अभद्रता कर रहा है और मुझे हँसी आरही है ? पर है बड़ा सुन्दर ! प्यारा सा छैला ।

भाभी ! मेरी गेंद चुराई है तूनें ………अजीब लड़का है ये तो ।

अब बहु को लगा बनावटी क्रोध करना ही पड़ेगा ……….

घूँघट को हटाकर ……वो वधू चिल्लाई ………झूठ बोलते हो ……..मैने तुम्हारी गेंद देखि भी नही है ……………झूठे ! कौन हो तुम ?

ओह ! मेरी दोनों गेंद चुराई हैं तुमनें भाभी !

अब तो भाभी की विचित्र स्थिति हो गयी …….पर तब तक ……

बहु ! तू ठीक तो है ना ? सासू और इस वधू का पति दोनों दूर से आते हुये दिखाई पड़े ………..बहू तो बैठ गयी थी जमीन में …………तलाशी लेनें ही वाले थे श्याम सुन्दर ……..कि तभी ……..”बहु ! किसी नें रँग तो नही लगा दिया”…….

बस जैसे ही श्याम सुन्दर नें देखा ……इसके पति और सास आगये हैं ……वे भागे ……………

हे वज्रनाभ ! श्याम सुन्दर को दुःख हुआ कि नही पता नही …….पर उस बेचारी बहू को बड़ा दुःख हुआ ……कि ये सास और खसम क्यों आगये ? उस वधू की वेदना को कोई संवेदनशील व्यक्ति ही समझ सकता है ।………श्याम सुन्दर तलाशी ले रहे थे ….पर …….अपना माथा पकड़ कर बैठी है ये वधू ।

शेष चरित्र कल…🙏

🦜 राधे राधे🦜

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