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August 31, 2025 4:23 am

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!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 96 !!-जब मथुरा पहुँचें उद्धव…भाग 1: Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 96 !!-जब मथुरा पहुँचें उद्धव…भाग 1: Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 96 !!

जब मथुरा पहुँचें उद्धव…
भाग 1

सन्ध्या की वेला हुयी है ……..नित्य की तरह श्रीकृष्ण अपनें महल की अत्युन्नत अट्टालिका में जाकर खड़े हो गए थे ………

जब से वृन्दावन गए हैं उद्धव ……..ये नियम ही बन गया था श्रीकृष्ण का ………अपनी अट्टालिका में जाकर खड़े हो जाते थे ……

यहाँ से वृन्दावन का मार्ग दिखाई देता था ……….वृन्दावन के पथ पर दृष्टि सहज चली जाती थी …..कौन आरहा है ….कौन जा रहा है …..सब दिखाई देता था ……………..ये नित्य नियम ही था श्रीकृष्ण का ।

आँखें गढ़ा कर देखते रहते थे ……कि उद्धव आज आएगा ……….मेरी मैया का सन्देश लाएगा …….मेरे बाबा का सन्देश लाएगा ………..

फिर वो एक आह भरते थे ………”मेरी राधा” ।

दिन गिनते -गिनते पक्ष, पक्ष गिनते -गिनते मास, मास भी तो छ मास बीत चुके हैं ………..क्यों नही आया मेरा सखा उद्धव !

कह कर तो गया था – “कुछ “घड़ी” चर्चा करूँगा फिर शीघ्र आजाऊंगा ……….रात्रि यहीं मथुरा में ही ………..।

मैने कहा था – उद्धव ! एक रात तो मेरे वृन्दावन में बिता लेना ।

वो मेरी बात काटता नही है………कुछ बोला नही था ।

पर हद्द है ! जो व्यक्ति एक रात वृन्दावन में न सोनें की बात करता हो ……वो छ महिनें !

श्रीकृष्ण अपनी अट्टालिका में बैठे बैठे सोच रहे हैं……..

तभी – एक रथ दिखाई दिया………..श्रीकृष्ण दूर देखनें की कोशिश करते हैं ………हाँ ……….ध्वजा में चन्द्रमा लगा है ………ये रथ उद्धव का ही है ………रथ खड़ा है ……….श्रीकृष्ण देखनें की कोशिश करते हैं ……..पहचाननें की कोशिश करते हैं ………

धूल धूसरित कोई व्यक्ति है ………केश बिखरे हुए हैं …….धूल केशों में भी लगी है ………अरे ! यही तो है मेरा उद्धव !

श्रीकृष्ण ख़ुशी से नाच उठे ………मेरा उद्धव !

उद्धव रथ पर बैठ चुके हैं ……….और रथ चला रहे हैं ।

श्रीकृष्ण जल्दी जल्दी सीढ़ियों से नीचे उतरनें लगे थे ………..

उनकी पीताम्बरी गिर गयी थी …….उनके चरण पादुका कहाँ रह गए थे पता नहीं …….वो पागलों की तरह उतर रहे थे सीढ़ियों से ।

उनकी साँसे फूल रही थीं ………वो जैसे ही अट्टालिका से उतर कर नीचे आये ……..और उद्धव की प्रतीक्षा करनें लगे, तभी –


कृष्ण ! क्या हुआ ?

वसुदेव जी उसी समय वहाँ आगये थे ….और कृष्ण को इस तरह सीढियाँ उतरते देख ……….सब ठीक तो है कृष्ण ? पूछ लिया ।

तभी अक्रूर भी वहाँ आकर खड़े हो गए ……………

किसी की प्रतीक्षा हो रही है क्या ?

अक्रूर नें भी पूछ लिया ।

क्रमशः …
शेष चरित्र कल –

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