अर्पित,तर्पित,और समर्पण यह तीन भाव भारतीय यज्ञ संस्कृति है : Praful Shukla

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“अर्पित,तर्पित,और समर्पण यह तीन भाव भारतीय यज्ञ संस्कृति है : यज्ञ जीवन में प्रकाश लाता है” उपरोक्त शब्द आज कथावाचक प्रफुल्ल भाई शुक्ला ने “पूर्व सांसद दहयाभाई पटेल की स्मृति में
दमण में चल रही भागवत कथा के बाद मुख्य यजमान
जिग्नेशभाई दहयाभाई पटेल के आवास पर चल रही भागवत
यज्ञ में दशमांश एकत्रित किया गया।भारी संख्या में भावी श्रद्धालु
यज्ञ में शामिल हुए. यज्ञ का महत्व बताते कथावाचक
प्रफुल्ल भाई शुक्ल ने कहा कि ”यज्ञ भारतीय संस्कृति का हिस्सा है
परंपरा है”, यज्ञ से वर्षा होती है और वर्षा से अन्न पकता है
हैं, “अर्पित, तर्पण और समर्पित ये भारतीय यज्ञ के तीन मूल्य हैं।”
संस्कृति में ऐसे समय हैं जब माता-पिता के घर में यज्ञ नहीं किया जाता
घर घर नहीं बल्कि श्मशान है जहां स्मरण या तर्पण नहीं होता

मुख्य यजमान जिग्नेशभाई दहयाभाई पटेल, हेताक्षीबेन
जिग्नेशभाई पटेल (सरपंच श्री गेलवाड), चंचलबेन दहयाभाई
जगुरतिबेन दहयाभाई पटेल के मेजबान पद पर प्राचार्य पटेल
चेतनभाई जोशी (भीमपोर), किशन दवे और विप्र वृंद द्वारा राष्ट्र
सूक्तम का पाठ किया गया।आज यज्ञ मां महेशभाई
पटेल, जैस्मिन महेशभाई पटेल, जगनभाई के. पटेल, अशोकभाई
पी। पटेल, भाविनीबेन ए. पटेल, संजयभाई पटेल, अमरतभाई
पटेल (दाभेल), अशोकभाई एम. पटेल, नवीनभाई पंड्या
(पार्डी), मिशाल जी. पटेल, अश्विना एम पटेल, रिमाबेन एम।
पटेल, ज़ंखनाबेन पटेल, रिकेन पटेल और यज्ञ माँ उपस्थित थे
की पेशकश की। कल कथा में भागवत कथा के प्रधान
उत्सव कृष्ण जन्मोत्सव भव्य रूप से मनाया जाएगा
आयोजकों की ओर से तैयारियां की जा रही हैं.

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