Niru Ashra: 🌷🌷🌷🙏🌷🌷🌷
!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 136 !!
“वे मिलेंगें” – प्रियतम से मिलनें की तड़फ़
भाग 1
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ललिता कह रही है कि – श्यामसुन्दर कुरुक्षेत्र में मिलेंगे !
सच ! ये सच है ? मुझे तो आज कल जागते हुए भी स्वप्न ही दिखाई देते हैं …………..श्याम सुन्दर मिलेंगें ?
मैं क्या कहूँगी उन्हें ? मैं तो उनके मुखारविन्द की ओर देख भी न सकूँगी ……..क्या वे मुझे अपनें हृदय से लगायेंगें ? उफ़ !
सौ वर्ष हो गए पूरे ……….यही कहती हैं ये मेरी सखियाँ ……..हो ही गए होंगें …….पर मुझे तो कभी कभी लगता है …..वे मेरे पास में ही हैं ……मेरे ही आस पास ……………
नही तो नित्य प्रातः मैं गवाक्ष में जाकर खड़ी हो जाती हूँ ……और उधर से मेरे प्रियतम मुझे कमल का पुष्प देते हैं ……….मैं उस कमल पुष्प को ले आती हूँ ………कैसे कहूँ कि वे मुझे छोड़कर चले गए ।
शताधिक बैल गाड़ियाँ चल रही हैं कुरुक्षेत्र के लिये………सब में मेरे वृन्दावन वाले बैठे हैं ……..मेरी प्यारी अष्टसखियों के साथ मैं भी बैठी हूँ………पर मेरे सामनें तो श्यामसुन्दर ही हैं …………वे ही खड़े हैं ……..मुस्कुरा रहे हैं ………कह रहे हैं …….. राधे ! मैं पहुँच चुका हूँ कुरुक्षेत्र …..तुम कहाँ हो ? मैं भी चल चुकी हूँ ………..मुझे हँसी आरही है ………..बिल्कुल नही बदले तुम …….वैसे ही हो ……….चंचल , चपल …….।
सब लोग होंगें वहाँ …….सुना है विश्व उमड़ रहा है कुरुक्षेत्र में ………बहुत भीड़ होगी ………..नही नही ………मुझे अपलक न देखना प्यारे ! वैसे राधा को कोई परवाह नही है ………..तुम अपनी सोचो ………द्वारिकाधीश हो …….हजारों रानियाँ हैं तुम्हारी …….हजारों पुत्र पौत्र हैं तुम्हारे………लोग क्या कहेंगें ? तुम देखना ।
सब खुश हैं ……….ग्वाल बाल ……….गोपियाँ ……..मैया यशोदा बाबा मेरी सखियाँ सब खुश हैं ……………
हाँ दुःखी तो वृन्दावन हो गया था …….जब हम चले थे ………
क्रमशः ….
शेष चरित्र कल –
👏 राधे राधे👏
Niru Ashra: 🌷🌷🌷🙏🌷🌷🌷
!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 136 !!
“वे मिलेंगें” – प्रियतम से मिलनें की तड़फ़
भाग 2
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सब लोग होंगें वहाँ …….सुना है विश्व उमड़ रहा है कुरुक्षेत्र में ………बहुत भीड़ होगी ………..नही नही ………मुझे अपलक न देखना प्यारे ! वैसे राधा को कोई परवाह नही है ………..तुम अपनी सोचो ………द्वारिकाधीश हो …….हजारों रानियाँ हैं तुम्हारी …….हजारों पुत्र पौत्र हैं तुम्हारे………लोग क्या कहेंगें ? तुम देखना ।
सब खुश हैं ……….ग्वाल बाल ……….गोपियाँ ……..मैया यशोदा बाबा मेरी सखियाँ सब खुश हैं ……………
हाँ दुःखी तो वृन्दावन हो गया था …….जब हम चले थे ………
आप भी हमें छोड़ दोगी हे राधारानी ! श्याम सुन्दर तो हमें छोड़कर चले गए …….आप तो मत त्यागों हमें ।
मैं वृन्दावन को भला छोड़ सकती हूँ ?……….मेरा अपना घर है वृन्दावन तो ……..मैं आऊँगी ……..शीघ्र आऊँगी ।
गाय भी कितनी व्याकुल हो उठी थीं………उन्हें भी सम्भालना पड़ा …..इसलिये तो मेरे बाबा बृषभान जी…..और मेरी मैया कीर्ति रुक गयीं वृन्दावन में……..वृन्दावन को …गौ को ……यहाँ के पशु पक्षी इन सबकी देख रेख कौन करेगा ?
वे मिलेंगें !
एकान्त में मिलेंगें………ओह ! मेरी साँसे तेज़ हो रही हैं अभी से ।
मेरी धड़कनें कितनी तेज़ हो गयी हैं…………
उनके मुख से…सौ वर्षों के बाद सुनूंगी……राधे ! ओ मेरी प्यारी राधे !
क्रमशः ….
शेष चरित्र कल –
👏 राधे राधे👏


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