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August 30, 2025 10:32 am

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श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! वर्षा-नृत्य – एक अद्भुत झाँकी !!- : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! वर्षा-नृत्य – एक अद्भुत झाँकी !!- : Niru Ashra

श्रीकृष्णचरितामृतम्

!! वर्षा-नृत्य – एक अद्भुत झाँकी !!

श्याम सुन्दर नें अपनी प्यारी की जब वो उन्मुक्त मुस्कुराहट देखि ……..तो कुञ्ज में गए …..और हाथ पकड़ कर मुक्त आकाश के नीचे लेकर आये …………नही , नही, ………..हँसते हुये मना करती हैं श्रीराधा ……पर श्याम अब कहाँ मानेंगें ।

मयूर पिच्छ लहरा रहा है ……..अलकें हिल रही हैं ……पीताम्बरी फहर रही है । श्रीजी की शोभा का वर्णन तो शब्दों में हो ही नही सकता ……..दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर घूम रहे हैं ……….अच्छे से घूम रहे हैं ……इन दोनों युगल के घूमनें के कारण ……सब घूम रहे हैं …….पृथ्वी, आकाश, वृक्ष वन ……….सब ।

श्रीराधारानी गिर न पड़ें इसके लिये श्याम सुन्दर अब रुक जाते हैं …..सम्भालते हैं अपनी प्रिया को …………बैठ जाते हैं अवनी पर …….क्यों की अब दोनों को चक्कर आरहे हैं ………..दोनों हँसते हैं ….एक दूसरे पर गिरते हैं …………।

प्यारे ! उन्मुक्त हँसते हुये श्रीराधा कह रही हैं ।

प्यारी ! कहो ……….श्याम भी हँस रहे हैं ।

कितना आनन्द आरहा है ना ! श्रीजी अपनें प्राण से कहती हैं ।

“पर सब नाच रहे हैं”……..श्याम सुन्दर की हँसी रुक ही नही रही ।

हाँ ….सच ! देखो प्यारी ! ये पृथ्वी नाच रही है …….ये आकाश नाच रहा है …….ये वृक्ष , ये वन सब नाच रहे हैं ।

प्राण ! तुम नाचोगे तो सब नाचेंगे ही ! श्रीराधा बोलीं ।

मैं कहाँ नाच रहा हूँ ? श्याम सुन्दर अब स्थिर बैठे हैं ।

तुम स्थिर हो या चंचल , पर प्यारे ! सच में स्थिर तो तुम ही हो ……बाकी सब नाच ही रहे हैं । श्रीराधा बोलीं ।

सब कुछ समझनें के बाद भी ये श्याम अबुझ बनता है ……..

पर तुमसे तो कोई पूछे ! …कि तुम नचा रहे हो इसलिये सब नाच रहे हैं ।

आनन्दित हो उठीं थीं श्रीराधा……हाँ …..सबको तुम नचा रहे हो प्यारे ! …….पृथ्वी, आकाश वृक्ष चराचर जीव …..सबको तुम नचा रहे हो ……इसलिये सब नाच रहे हैं …….।

पर…….मैं समझा नही , तुम कहना क्या चाहती हो प्यारी !

हद्द है ………..कितना अबुझ बनता है ये श्याम सुन्दर ।

पर फिर एकाएक श्यामसुन्दर नें अपनी प्यारी का हाथ पकड़ कर उठाया ……..और घूमनें लगे ………….अच्छे से घूमनें लगे ………पर अकेले कहाँ ……….पूरा आस्तित्व ही इनके साथ घूम रहा था …..पृथ्वी, आकाश, वृक्ष, वन और समस्त ब्रह्माण्ड ।

आहा ! तभी तो सर्वत्र हरा ही हरा हो गया ……….क्यों की घूम रहे हैं दोनों ……एक काला कृष्ण और एक स्वर्ण की तरह श्रीराधा ……दोनों को मिला दो तो होता है …..”हरा”…….सम्पूर्ण सृष्टी में युगलवर ही तो नृत्य कर रहे हैं ।

जय जय श्री युगल सरकार की ।

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