श्रीकृष्णचरितामृतम्-!! स्यमन्तक मणि – “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 18” !!-भाग 1 : Niru Ashra

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श्रीकृष्णचरितामृतम्

!! स्यमन्तक मणि – “उत्तरश्रीकृष्णचरितामृतम् 18” !!

भाग 1

देखो ना ! अभी तक प्रसेन नही आया !

सत्राजित को अपनें भाई प्रसेन पर अब क्रोध आरहा था ।

मैने उसको कहा था कि सन्ध्या के समय मणि की पूजा करनी होती है ……उस समय तक स्यमन्तक मणि लेकर चले आना ……….पर !

आपनें भी क्यों दिया उसे मणि ………..बालक ही तो है प्रसेन !

पत्नी सत्राजित को कह रही थी ।

मुझे क्या पता था कि वो इतना प्रमादी है……सूर्य भगवान द्वारा प्रदत्त मणि उसकी पूजा अर्चना आवश्यक है ….इस बात को वो समझता ही नही है…..ओह! सत्राजित क्रोध में अपनें केशों को खींचनें लगा था ।

पर सत्राजित का क्रोध भय में बदलनें लगा ………..क्यों की समय बीतता गया किन्तु प्रसेन नही आया ………….समय बीतते बीतते रात्रि हो गयी …..और रात्रि भी अर्ध रात्रि ……………सत्राजित की आँखों में भय स्पष्ट दिखाई दे रहा था ………….उसनें अपनें पत्नी को अर्ध रात्रि में कहा ………एक बात कहूँ ! किसी से कहना मत …….!

नही कहूँगी ….आप कहिये तो !

मुझे पता है मेरा भाई मारा गया है ………………क्या !! सत्राजित की बात सुनकर पत्नी चौंक गयी ।

ये आप क्या कह रहे हैं ?

हाँ ….और किसनें मारा है ये भी मुझे पता है ……………सत्राजित की आँखें लाल हो गयीं थीं क्रोध के कारण ………….

किसनें मारा है !

द्वारिकाधीश नें ………सत्राजित नें कहा ।

मुझ से सभा में स्यमन्तक मणि माँगी थी कृष्ण नें ……किन्तु मैने मना कर दिया ……….हाँ , क्यों देता मैं अपनी मणि …….पर उसनें मेरे भाई को मार कर मणि छीन ली …………ये कहते हुये अब सत्राजित रोनें लगा था …….मार दिया मेरे भाई प्रसेन को कृष्ण नें …….एक मणि के लिए ।

पत्नी सांत्वना देती रही …………समझाती रही किन्तु !


तात ! फैल गयी थी ये बात द्वारिका में ……….कि सत्राजित की स्यमन्तक मणि खो गयी है …….और ये मणि जिसके पास थी वो भाई भी मारा जा चुका है …………उद्धव बोले ……..ये समाज है ……इसनें किसे छोड़ा ! भगवान श्रीराघवेन्द्र की प्रिया के ऊपर भी तो कलंक लगाया था……और आज भगवान श्रीकृष्ण पर कलंक लगा ।

महारानी ! आपनें सुना ? चरण दवा रही थी दासी रुक्मणी के …….तब वो बोलनें लगी ।

नही, क्या बात है ? रुक्मणी नें दासी से पूछा ।

स्यमन्तक मणि खो गयी ………दासी बोली ।

तो ? रुक्मणी को क्या रूचि उस मणि में ।

जिसके पास वो मणि थी वो मारा गया है…….और !

बोलते बोलते दासी रुक गयी ।

और क्या? मारने में द्वारिकाधीश का नाम आरहा है ……..क्यों की मणि उन्होंने माँगी थी सत्राजित से ……..किन्तु सत्राजित नें मणि नही दी तो लोगों का कहना है कि ……………..

क्रमशः …
शेष चरित्र कल –

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