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August 30, 2025 11:02 am

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કેતન પટેલ પ્રમુખ ए ભારતીય રાષ્ટ્રીય કોંગ્રેસપ્રદેશ કોંગ્રેસ સમિતિ, દમણ અને દીવ દ્વારા ૨૫/૦૮/૨૦૨૫ ના રોજ પ્રફુલભાઈ પટેલને પત્ર લખ્યો છે દમણ જિલ્લાને મહાનગર પાલિકામાં અપગ્રેડ કરવાનો પ્રસ્તાવ

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!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 63 !!-पतंग तो जलता है, सखी ! दीपक भी तो जलता है भाग 2 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 63 !!-पतंग तो जलता है, सखी ! दीपक भी तो जलता है भाग 2 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 63 !!

पतंग तो जलता है, सखी ! दीपक भी तो जलता है
भाग 2

रोहिणी और वसुदेव नें भी देखा……..मेरे साथ नही आया मेरा पुत्र …..उद्धव के साथ आगया……..मैने उसे बुलवाया भी था ……मेरी कितनी इच्छा थी कि हम सब परिवार एक साथ स्नान करते ……उज्जैन से आनें की प्रतीक्षा ही करती रही थी मैं ……..ताकि अपनें पुत्र के साथ समय बिताऊँ ………इतना कहते हुए रो गयीं देवकी ।

देखो ! देवकी ! इस तरह से दुःखी मत हो …………ग्यारह वर्ष हो गए ये हमसे दूर रहा है …………इसलिये शायद हमसे सहज नही हो पाता ………समय लगेगा देवकी ! देवकी को समझाते रहे वसुदेव जी ।


हाँ ……….ये स्थान ठीक है …………एकान्त है ………यमुना यहाँ शान्त भी हैं ……ओह ! कदम्ब का वृक्ष भी है यहाँ तो …………

मुस्कुराते हुये देख रहे थे कृष्ण यमुना की लहरों को …………..

पर …………….उफ़ ! याद आगयी ………………

क्या अभी भी इसी कालिन्दी के किनारे बैठती होगी मेरी श्रीराधा !

क्या गोपियाँ अभी भी जल भरनें आती होंगीं !

और वहाँ बैठकर मेरी चर्चा करती होंगीं ………..

नेत्रों से अश्रु बूँद गिरनें लगे कृष्ण के ।


वृन्दावन ……..यमुना के किनारे आज यहाँ भी भीड़ है ।

श्रीराधारानी मध्य में हैं…….सखियाँ उनको घेरकर बैठी हुयी हैं ।

यही यमुना मथुरा जाती है ना ? एक सखी बोल गयी ।

क्या हमारी तरह कृष्ण भी यमुना के किनारे बैठते होंगें मथुरा में ?

दूसरी सखी भी बोल पड़ी ।

ओह ! शान्त बैठी श्रीराधा रानी को मानों किसी नें झकझोर दिया हो …………..

उठकर गयीं एकाएक …..चार कदम चलते हुए यमुना के जल में आकर फिर खड़ी हो गयीं ।

देखती रहीं उस नीले जल को…..टप् टप् करके आँसू गिरनें लगे ।

हे वज्रनाभ ! अपनें प्रियतम कृष्ण को सन्देश देती हैं श्रीराधारानी …..

माध्यम चुना है आज कालिन्दी को ।


हे कालिन्दी ! मेरा एक सन्देश कहोगी मेरे प्रियतम से !

कहना ! तेरी राधा रोज मेरे तट में आती है ……बैठी रहती है…….मेरे नीले रँग को देखकर तुझे याद करती है ………तुमनें जिस गागर को छूआ था ……उसी गागर को लेकर आती है ।…….पर कालिन्दी ! मैं तुम्हे कितना “नयन जल” दे जाती हूँ – ये मत कहना ।

क्रमशः …
शेष चरित्र कल –

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