!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 70 !!
वो ममता की मारी – मैया यशोदा
भाग 2
मैं स्नान करके सन्ध्या कर लेता हूँ ……..तब तक तुम यशोदा से बातें कर लो ……….उसे बहुत कुछ जानना है अपनें लाल के बारे में …….तुम्हे बताएगी भी वो ……सुन लेना उद्धव ! नन्द जी नें इतना कहकर उद्धव को भेज दिया था – जिस तरफ मैया यशोदा थीं ।
सो जा मेरे लाल ! सो जा मेरा कान्हा ! सो जा मेरे श्याम !
मैं उद्धव ! मैं देवभाग का पुत्र उद्धव ….आपके चरणों में प्रणाम करता हूँ …………उद्धव नें देखा एक वात्सल्य से भीगीं माता ……..
झूले को हिला रही है…….और आश्चर्य ! वो झूला खाली है ।
चुप ! चुप ! मत बोल …………बहुत धीरे से बोलीं थीं वो माता ।
बड़ी मुश्किल से सुलाया है इसे …………..तू जोर से बोलेगा न ……तो जग जाएगा ……….चुप ! फिर मैया शुरू –
सो जा मेरे लाल ! सो जा मेरे कान्हा ! सो जा मेरे श्याम !
उद्धव के कुछ समझ में नही आरहा ….कि यहाँ क्या हो रहा है ये सब ।
सुन ! फिर धीरे से बोलनें लगीं यशोदा मैया …………..
आज बड़ा ऊधम मचाया इसनें………मैं तो परेशान हो गयी हूँ …..क्या करूँ ? अब देख ! पहले कह रहा था माखन दे …..फिर कहनें लगा …..चन्द्रमा दे………….मुँह छुपाकर हँसनें लगीं मैया ।
अब आकाश का चन्द्रमा मैं कहाँ से दूँ ?
फिर कहनें लगा …….बहू ला दे ……………..बहू चाहिये इसे ……हँसी रुक ही नही रही है यशोदा की …………………
जैसे तैसे मैने इसे समझाया………..और माखन खिलाकर सुला दिया …..बड़ी मुश्किल से सोया है ये……..यशोदा मैया बोले जा रही हैं ।
ऐसी स्थिति होगयी है कृष्ण के मैया की ?
उद्धव को अच्छा नही लग रहा ।
पर माता ! वो तो मथुरा गए हैं !………….उद्धव को सच बोलनें का व्यसन है …………..यहाँ भी सच बोल ही दिया ।
नही ………ये झूठ है ………जो ये कहता है मेरा लाला मथुरा गया …..वो झूठ बोलता है ……….मेरा कन्हाई यहीं है………..देख ! यहीं है ।
और जैसे ही पालनें में हाथ रखा मैया नें…….पालना खाली है…..
धड़ाम से गिर गयीं धरती पर………और मूर्छित हो गयीं ।
क्रमशः ….
शेष चरित्र कल …….


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