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August 30, 2025 6:54 am

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!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 70 !!-वो ममता की मारी – मैया यशोदा भाग 3 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 70 !!-वो ममता की मारी – मैया यशोदा भाग 3 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 70 !!

वो ममता की मारी – मैया यशोदा
भाग 3

उद्धव को अच्छा नही लग रहा ।

पर माता ! वो तो मथुरा गए हैं !………….उद्धव को सच बोलनें का व्यसन है …………..यहाँ भी सच बोल ही दिया ।

नही ………ये झूठ है ………जो ये कहता है मेरा लाला मथुरा गया …..वो झूठ बोलता है ……….मेरा कन्हाई यहीं है………..देख ! यहीं है ।

और जैसे ही पालनें में हाथ रखा मैया नें…….पालना खाली है…..

धड़ाम से गिर गयीं धरती पर………और मूर्छित हो गयीं ।


कैसे हैं वसुदेव ? कैसे हैं महाराज उग्रसेन ? मथुरा वासी अब प्रसन्न तो होंगें ना ? अक्रूर कैसे हैं ?

बृजपति नें ही आकर यशोदा को सम्भाला था ……..जल का छींटा देकर उठाया था ………..यशोदा ! ये है हमारे कन्हाई का मित्र – उद्धव !

बड़े ध्यान से देखती रहीं यशोदा, उद्धव को ………….

मेरा लाल ? कहाँ है मेरा कन्हाई ? उद्धव के मुख में देखती हुयी पूछ रही हैं ।

वो आएगा ! देखो यशोदा ! उसनें अपनें मित्र को भेजा है ना !

नन्द जी बोले ।

ये मित्र है ? तुम मित्र हो मेरे लाल के ?

हाँ हाँ ….ये मित्र हैं ……..अब कुछ देर चुप हो जाओ ……..मुझे बात करनें दो …..नन्द जी , यशोदा को समझाकर अब उद्धव से चर्चा करनें लगे थे ।

कैसे हैं वसुदेव ? कैसे हैं महाराज उग्रसेन ? अक्रूर कैसे हैं ?

इन प्रश्नों को यशोदा मैया नें सुन लिया …………चिल्ला पडीं एकाएक –

अरे ! आपको क्या मतलब वसुदेव से ……आपको क्या लेना देना है उग्रसेन से …….उस अक्रूर से क्या प्रयोजन हम लोगों का …..

आप सीधे पूछिये ना ! हमारा कन्हाई कैसा है ?

आप सीधे पूछिये ना ! मेरा लाल कैसा है ?

मथुरा में उसे भर पेट माखन मिलता तो है ना ?

यशोदा के इस प्रश्न पर नन्द जी नें यशोदा से ही कहा –

अरे ! मथुरा में वो राजमहल में है ……..उसे क्या कमी है वहाँ !

नही ……..राजमहल है तो क्या हुआ ? मेरा लाल, जब तक उसे कोई जिद्द करके न खिलाये …….वो खाता ही नही है ……………उसे कोई जिद्द करके खिलाता है ? कहीं ऐसा न हो मेरा लाला भूखा ही रह जाए ।

हिलकियों से रो पडीं यशोदा मैया ………अपनें आँसू पोंछते हुये नन्द जी नें अपनी भार्या यशोदा को सम्भाला था ।

उद्धव कुछ समझ नही पा रहे …….कि मैं इन्हें कैसे समझाऊँ ……..मुझे श्रीकृष्ण नें समझानें के लिये ही तो भेजा है ………पर !

शेष चरित्र कल …….

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