🙏🥰 श्रीसीताराम शरणम् मम 🥰🙏(63-2),श्रीकृष्णकर्णामृत – 104 तथा श्रीमद्भगवद्गीता: नीरू आशरा
🙏🥰 श्रीसीताराम शरणम् मम 🥰🙏श्रीकृष्णकर्णामृत – 104 मैंजनकनंदिनी..6️⃣3️⃣भाग 2 ( माता सीता के व्यथा की आत्मकथा)🌱🌻🌺🌹🌱🌻🌺🌹🥀💐 पाहि नाथ कहि पाहि गोसाँई…..📙( रामचरितमानस )📙🙏🙏👇🏼🙏🙏 मैं वैदेही ! भरत उठे थे ……और वृक्षों से गले लग कर रोनें लगे थे ………. ये वृक्ष भी भाग्यशाली हैं ना इस चित्रकूट के ? शत्रुघ्न ! ये वन , यहाँ … Read more