🙏🥰 श्री सीताराम शरणम् मम 🥰 🙏🌺1️⃣1️⃣7️⃣(3)[]“श्रीकृष्णसखा ‘मधुमंगल’ की आत्मकथा-45”,श्री भक्तमाल (145) तथा श्रीमद्भगवद्गीता : नीरु आशरा
🌱🌻🌺🌹🌱🥰🌻🌺🌹🌾💐 त्यक्त्वा सुदुस्त्यजसुरेप्सितराज्यलक्ष्मींधर्मिष्ठ आर्यवचसा यदगादरण्यं ।मायामृगं दयितयेप्सितमन्वधावत्वन्दे महापुरुष ते चरणारविन्दम् ॥ “वैदेही की आत्मकथा” गतांक से आगे – मैं वैदेही ! पर हनुमान ! शत्रु के भाई पर हम कैसे विश्वास करें ? सुग्रीव नें हनुमान की बात बीच में काटी …………..तो हनुमान चुप हो गए ……..वो बस प्रभु श्रीराम के मुख की ओर ही … Read more