महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (023) : Niru Ashra
महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (023) (स्वामी अखंडानंद सरस्वती ) योगमाया का आश्रय लेने का अर्थ मनश्चक्रे योगमायामुपाश्रितः श्रीशुक उवाच भगवानपि ता रात्रीः शरदोत्फुल्लमल्लिकाः ।वीक्ष्य स्तुं मनश्चक्रे योगमायामुपाश्रितः ।। मनुष्य कर्म करता है आनन्द के लिए और मनुष्य ज्ञान भी प्राप्त करता है आनन्द के लिए। आनन्द तो जीवन का प्रयोजन है। प्रयोजन किसको बोलते … Read more