!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 135 !!(3),!! निकुँजोपासना का सिद्धान्त !!,श्रीमद्भगवद्गीता&महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (096-97) : निकुँजोपासना का सिद्धान्त !! : Niru Ashra
Niru Ashra: !! निकुँजोपासना का सिद्धान्त !! ( “सिद्धान्त सुख”- 11 ) गतांक से आगे – ॥ दोहा ॥ बिबिधि सुरति संपति सहित, अति अद्भुत अभिराम ।चिदानंदघन जयति जै, श्रीवृन्दावन धाम ॥ ॥ पद ॥ जै जै श्रीवृन्दावन धाम। चिदानंदघन पूरन काम ॥बहति बिमल कल केलि रूपिनी, श्रीजमुना कमना चहुँकोद ।अति रस रंग तरंग उमंगनि, … Read more