🙏🥰 श्रीसीताराम शरणम् मम 🥰🙏(104-3),“श्रीकृष्णसखा ‘मधुमंगल’ की आत्मकथा – 5”,श्री भक्तमाल (106),“श्रीकृष्णसखा ‘मधुमंगल’ की आत्मकथा – 6” तथा श्रीमद्भगवद्गीता : Niru Ashra
] Niru Ashra: 🙏🥰 श्रीसीताराम शरणम् मम 🥰🙏 मैंजनकनंदिनी..1️⃣0️⃣4️⃣भाग 3 ( माता सीता के व्यथा की आत्मकथा)🌱🌻🌺🌹🌱🌻🌺🌹🥀💐 कायवाङ्मनसगं यदि व्यधां स्वप्नजागृतिषु राघवेतरम्।तद्दहाङ्गमिति पावकं यतीं भावये मनसि रामवल्लभाम्।। सबनें देवर्षि नारद जी के चरणों में प्रणाम किया ……………. क्या कहाँ आपनें देवर्षि ! ये मेरा सिंहासन मांगेगा, विधाता ब्रह्मा से ? नारायण नारायण …………..मेरा अनुमान गलत … Read more