🙏🥰 श्रीसीताराम शरणम् मम 🥰🙏(105-2),“श्रीकृष्णसखा ‘मधुमंगल’ की आत्मकथा – 8”,श्री भक्तमाल (108),“श्रीकृष्णसखा ‘मधुमंगल’ की आत्मकथा – 8” तथा श्रीमद्भगवद्गीता : Niru Ashra
[] Niru Ashra: 🙏🥰 श्रीसीताराम शरणम् मम 🥰🙏 मैंजनकनंदिनी..1️⃣0️⃣5️⃣भाग 2 ( माता सीता के व्यथा की आत्मकथा)🌱🌻🌺🌹🌱🌻🌺🌹🥀💐 इन्द्ररुद्र-धनदाम्बुपालकै: सद्विमान-गणमास्थितैर्दिवि।पुष्पवर्ष-मनुसंस्तुताङ्घ्रिकां भावये मनसि रामवल्लभाम्।। क्या सोच रहे हो पुत्र रावण ! सिर में हाथ फेरते हुए ऋषि नें पूछा । मैं कुबेर की लंका, इस कुबेर से छिनूँगा ……..रावण नें स्पष्ट कहा । मूर्ख ! तेरा यही … Read more