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August 30, 2025 6:02 pm

उद्धव गोपी संवाद( भ्रमर गीत) ४९ एवं ५० : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद( भ्रमर गीत) ४९ एवं ५० : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद( भ्रमर गीत)४९ एवं ५० कोहू कहै री मधुप,भेष उन्हं कौ क्यौं धारयौ।स्याम,पीत,गुंजार -बेनुं-किंकिनि झंनकारयौ।।वा-पुर गोरस चोरि कें,फिरि आयौ इहि देस।इन्ह कों जिन्ह मानों कोऊ,कपटी इन्ह कौ भेष।।— चोरि जिन्ह जाइ कछु।।भावार्थ:-कोई गोपी कह रही हैं कि भंवरे तूने अपना भेष कृष्ण की तरह क्यों बनाया है,वही स्याम रंग,पीली बांसुरी और गुन गुन … Read more

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! – चतुस्त्रिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! – चतुस्त्रिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! ( चतुस्त्रिंशत् अध्याय: ) गतांक से आगे – प्रियतमे ! तुमसे किसने कहा कि मैं तुम्हें छोड़ रहा हूँ ? तुम मिथ्या शोक कर रही हो । हे प्रिया ! तुम मेरी प्राण हो …ये कहते हुए निमाई ने विष्णुप्रिया को अपने गोद में बिठा लिया था ….बेचारी प्रिया … Read more

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 40 !!-गहरो प्रेम समुद्र को भाग 2 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 40 !!-गहरो प्रेम समुद्र को भाग 2 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 40 !! गहरो प्रेम समुद्र कोभाग 2 तभी ………रँग देवि ! सुदेवी ! विशाखा ! चित्रा ! आओ इधर इधर आओ ! ललिता सखी फिर चिल्लाईं । ये सारी सखियाँ फिर दौड़ीं ……..हाँ क्या हुआ ललिता ! क्या हुआ ? ये देखो ! ललिता सखी फिर दूसरे चरण चिन्ह दिखानें लगी थीं । … Read more