उद्धव गोपी संवाद( भ्रमर गीत) ४९ एवं ५० : Niru Ashra
उद्धव गोपी संवाद( भ्रमर गीत)४९ एवं ५० कोहू कहै री मधुप,भेष उन्हं कौ क्यौं धारयौ।स्याम,पीत,गुंजार -बेनुं-किंकिनि झंनकारयौ।।वा-पुर गोरस चोरि कें,फिरि आयौ इहि देस।इन्ह कों जिन्ह मानों कोऊ,कपटी इन्ह कौ भेष।।— चोरि जिन्ह जाइ कछु।।भावार्थ:-कोई गोपी कह रही हैं कि भंवरे तूने अपना भेष कृष्ण की तरह क्यों बनाया है,वही स्याम रंग,पीली बांसुरी और गुन गुन … Read more