Explore

Search

August 31, 2025 4:08 am

महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (009) : Niru Ashra

महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (009) : Niru Ashra

महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (009) (स्वामी अखंडानंद सरस्वती ) रास की भूमिका एवं रास का संकल्प -भगवानपि०- प्रेमाद्वयोरसिकयो रविदीप एव, हृद्वेश्म भासयति निश्चल एष भाति ।त्वाराधयं वदनतस्तु विनिर्गतश्चेद्, निर्याति शान्तिमथवा तनुतामुपैति ।। यह प्रेम जो है, वह प्रेयसी और प्रेय दोनों के हृदय मंदिर में रहता है और दीपक के समाना प्रज्वलित होता है। … Read more

!! एक अद्भुत काव्य- “प्रेम पत्तनम्” !!( प्रेम नगर 15 – “नगर का वर्णन” ) : Niru Ashra

!! एक अद्भुत काव्य- “प्रेम पत्तनम्” !!( प्रेम नगर 15 – “नगर का वर्णन” ) : Niru Ashra

!! एक अद्भुत काव्य – “प्रेम पत्तनम्” !! ( प्रेम नगर 15 – “नगर का वर्णन” ) गतांक से आगे – यत्रान्तर्बहिरन्त: पद्मरागशकलकलधौतकलितान्यतिललितानि सकलान्येव सद्मानि ।यत्र विशालविद्रुमद्रुमशकलघटिता कलधौतकीलशृंखलादिजटिता सर्वत्रैव विकटा कपाटपटली ।यत्र सद्मशिखरोपरिसुवर्णरसरंजितैव पताकावली ।। अर्थ – जहाँ पद्मराग नामक ( लाल ) मणि उस नगर के भवन गृह प्रासाद आदि में लगे हुए हैं … Read more

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 94 !!-उद्धव को आज छ महिनें हो गए-भाग 3:Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 94 !!-उद्धव को आज छ महिनें हो गए-भाग 3:Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 94 !! उद्धव को आज छ महिनें हो गए …भाग 3 मैं रोता रहा……..और उस कदम्ब को गले से लगाता रहा । आज वर्षा रुकनें वाली नही लगती……..खूब बारिश हो रही है । उद्धव कदम्ब वृक्ष को गले से लगाकर जानें लगे ……………. फिर एक बार कदम्ब को मुड़कर देखा था उद्धव नें … Read more