उद्धव गोपी संवाद(भ्रमर गीत) ४५ एवं ४६ : Niru Ashra
उद्धव गोपी संवाद(भ्रमर गीत)४५ एवं ४६ ताही छिन इक भ्रमर, कहूं ते उड़ि तहां आयौ।ब्रज बनितन्हं के पुंज मांहि,गुंजत छवि छायौ।।बैठ्यौ चाहत पांइ पै,अरून कमल दल जानिं।मनुं मधुकर ऊधौ भयौ, प्रथम हि प्रगट्यौ आनिं।।– प्रेम कौ भेष धरि?भावार्थ:-उसी समय एक भंवरा कहीं से उड़ते हुए वहां आ पहुंचा, जहां ब्रज गोपियां झुंड में बैठी हुईं … Read more