उद्धव गोपी संवाद :६५ एवं ६६ : Niru Ashra
उद्धव गोपी संवाद:६५ एवं ६६ धन्न धन्न ए लोग,भजत जो हरि कों ऐसें।और कोहू बिन रस हि,प्रेम पावत कहौ कैसे।।मेरे वा लघु ज्ञान कौ,रह्रौ जु मद ह्वै व्याधि।अब जान्यों ब्रज-प्रेम कौ,लहति न आधों -आधि।।– वृथा श्रम करि मरयौ-भावार्थ:ऊधौ जी कह रहे हैं कि ये लोग धन्य धन्य हैं जो अपने हरि को इस प्रकार से … Read more