Explore

Search

August 30, 2025 6:56 pm

उद्धव गोपी संवाद :६५ एवं ६६ : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद :६५ एवं ६६ : Niru Ashra

उद्धव गोपी संवाद:६५ एवं ६६ धन्न धन्न ए लोग,भजत जो हरि कों ऐसें।और कोहू बिन रस हि,प्रेम पावत कहौ कैसे।।मेरे वा लघु ज्ञान कौ,रह्रौ जु मद ह्वै व्याधि।अब जान्यों ब्रज-प्रेम कौ,लहति न आधों -आधि।।– वृथा श्रम करि मरयौ-भावार्थ:ऊधौ जी कह रहे हैं कि ये लोग धन्य धन्य हैं जो अपने हरि को इस प्रकार से … Read more

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!- द्विचत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !!- द्विचत्वारिंशत् अध्याय : Niru Ashra

!! परम वियोगिनी – श्रीविष्णुप्रिया !! ( द्विचत्वारिंशत् अध्याय : ) गतांक से आगे – हे महामहिम ! क्या कहूँ आपको ? क्या सम्बोधन करूँ ? स्वामी ? नही , ये अधिकार मेरा छीन लिया है । मैं आपकी पत्नी आप मेरे स्वामी …ओह ! अच्छा होता ना , मैं आपकी पत्नी ही नही होती … Read more

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 43 !!-महाकाल का प्रेमरूप – “गोपेश्वर महादेव” भाग 1 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 43 !!-महाकाल का प्रेमरूप – “गोपेश्वर महादेव” भाग 1 : Niru Ashra

🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️🙇‍♀️ !! “श्रीराधाचरितामृतम्” 43 !! महाकाल का प्रेमरूप – “गोपेश्वर महादेव”भाग 1 प्रेम में अहंकार का प्रवेश कहाँ ? क्या ये बात सच नही है कि पुरुष का अर्थ ही अहंकार होता है ? प्रेम की धरातल पर पुरुष का प्रवेश कहाँ है…….वहाँ तो सब गोपी हैं ….. हाँ पुरुष है भी तो एक ही … Read more