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August 30, 2025 6:39 am

महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (027) : Niru Ashra

महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (027) : Niru Ashra

महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (027) (स्वामी अखंडानंद सरस्वती ) भगवान की प्रेम-परवशता(योगमायामुपाश्रित:)श्रीशुक उवाच भगवानपि ता रात्रीः शरदोत्फुल्लमल्लिकाः ।वीक्ष्य रन्तुं मनश्चक्रे योगमायामुपाश्रितः ।। अच्छा! आज रासपंचाध्यायी सुनाने से पहले दो-चार बात। ऐसा है कि सबेरे वेदान्त सुनते हैं और शाम को भक्ति की बात आप सुनाते हैं। तो दोनों में क्या संगति है? ऐसा कई … Read more

!! एक अद्भुत काव्य – “प्रेम पत्तनम्” !!-( प्रेम नगर 38 – “और जहाँ दुःख ही सुख है” ) : Niru Ashra

!! एक अद्भुत काव्य – “प्रेम पत्तनम्” !!-( प्रेम नगर 38 – “और जहाँ दुःख ही सुख है” ) : Niru Ashra

!! एक अद्भुत काव्य – “प्रेम पत्तनम्” !! ( प्रेम नगर 38 – “और जहाँ दुःख ही सुख है” ) गतांक से आगे – यत्र दुःखमेव सुखम् ।। अर्थ – जहाँ ( प्रेम नगर में ) दुःख को ही सुख माना गया है । *इस प्रेम नगर में दुःख ही सुख है । इससे पहले … Read more

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 102 !!-और इधर बरसानें में …भाग 2 : Niru Ashra

!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 102 !!-और इधर बरसानें में …भाग 2 : Niru Ashra

🙏🌸🙏🌸🙏🌸🙏 !! “श्रीराधाचरितामृतम्” 102 !! और इधर बरसानें में …भाग 2 झूठ बोलती हैं जीजी चन्द्रावली ………..अरे ! कंस को मार दिया ……हाँ तो मार दिया होगा, वह चतुर -चूड़ामणि हैं…….चतुराई करके मार दिया होगा कंस को………अरे ! हमारे श्याम सुन्दर ग्वाले हैं …..गौचारण करते हुए निकल गए मथुरा …….और कंस को मार दिया होगा … Read more

महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (026) : Niru Ashra

महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (026) : Niru Ashra

महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (026) (स्वामी अखंडानंद सरस्वती ) योगमाया का आश्रय लेने का अर्थ तो, योगाय या माया तां उपाश्रितः- ये संसार के बिछुड़े हुए लोग, विरही लोग, ये दुःखी लोग संसार के विषयों से प्रेम करके दुःखी हो गये। उनके दुःख निवाकरण के लिए ये परम कृपालु, ये करुणा, वरुणालय, ये करुणारुण … Read more

आज के विचार-!! एक अद्भुत काव्य – “प्रेम पत्तनम्” !!-( प्रेम नगर 37 – “जहाँ सुख ही दुःख है” ) : Niru Ashra

आज के विचार-!! एक अद्भुत काव्य – “प्रेम पत्तनम्” !!-( प्रेम नगर 37 – “जहाँ सुख ही दुःख है” ) : Niru Ashra

आज के विचार !! एक अद्भुत काव्य – “प्रेम पत्तनम्” !! ( प्रेम नगर 37 – “जहाँ सुख ही दुःख है” ) 26, 10, 2023 गतांक से आगे – यत्र सुख मेव दुःखं ।। अर्थ – जहाँ ( प्रेम नगर में ) सुख ही दुःख है । ****हे रसिकों ! सही कहा है “इस प्रेमनगर … Read more

आज के विचार-!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 102 !!-और इधर बरसानें में …भाग 1: Niru Ashra

आज के विचार-!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 102 !!-और इधर बरसानें में …भाग 1: Niru Ashra

🙏🌸🙏🌸🙏🌸🙏 आज के विचार !! “श्रीराधाचरितामृतम्” 102 !! और इधर बरसानें में …भाग 1 ललिता ठीक कहती है…..कि मैं इन दिनों अस्वस्थ हो गयी हूँ । हाँ मुझे भी लगनें लगा है ……….मुझे जगते हुये स्वप्न दीखते हैं । मैं न माननें वाली बातों को भी सत्य मान लेती हूँ…..परिणाम ? मैं दुःखी हो जाती … Read more