महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (027) : Niru Ashra
महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (027) (स्वामी अखंडानंद सरस्वती ) भगवान की प्रेम-परवशता(योगमायामुपाश्रित:)श्रीशुक उवाच भगवानपि ता रात्रीः शरदोत्फुल्लमल्लिकाः ।वीक्ष्य रन्तुं मनश्चक्रे योगमायामुपाश्रितः ।। अच्छा! आज रासपंचाध्यायी सुनाने से पहले दो-चार बात। ऐसा है कि सबेरे वेदान्त सुनते हैं और शाम को भक्ति की बात आप सुनाते हैं। तो दोनों में क्या संगति है? ऐसा कई … Read more