श्रीमद्भगवद्गीता-अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान🌹श्लोक 4 . 37🌹यथैधांसि mm |ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा || ३७ ||: Niru Ashra
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 : दिव्य ज्ञान🌹🌹🌹🌹🌹🌹श्लोक 4 . 37🌹🌹🌹🌹यथैधांसि समिद्धोSग्निर्भस्मसात्कुरुतेSर्जुन |ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा || ३७ || यथा – जिस प्रकार से; एधांसि – ईंधन को; समिद्धः – जलती हुई; अग्निः – अग्नि; भस्म-सात् – राख; कुरुते – कर देती है; अर्जुन – हे अर्जुन; ज्ञान-अग्निः – ज्ञान रूपी अग्नि; सर्व-कर्माणि – भौतिक कर्मों के … Read more