!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 144 !!(2), !! निकुँजोपासना का सिद्धान्त !!, महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (120)& श्रीमद्भगवद्गीता : Niru Ashra
] Niru Ashra: !! निकुँजोपासना का सिद्धान्त !! ( “सिद्धान्त सुख” – 37 ) गतांक से आगे – ॥ पद ॥ मन की रुचि सुचि सेवा करहीं। छिन-छिन प्रति ऐसें अनुसरहीं ॥भावत जो सोई ढर-ढरहीं। निरखि नवलछबि आनँद भरहीं ॥कोउ सखि कछू कोउ कछु लीयें। सब ठाढ़ी सनमुख रुख दीयें ॥तन मन प्रान समर्पन कीयें। … Read more