!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 144 !!(3),!! निकुँजोपासना का सिद्धान्त !!,महारास (दिव्य प्रेम का नृत्य) (121)& श्रीमद्भगवद्गीता : Niru Ashra
!! “श्रीराधाचरितामृतम्” 144 !! श्रीराधारानी द्वारा द्रोपदी को “प्रेमतत्व” की शिक्षाभाग 3 🌹🙏🌹🙏🌹 कौन सी आफ़त आगयी थी……..जो अपनें प्रेमास्पद को इतना कष्ट दिया तुमनें……….श्रीराधारानी भाव में बोल रही थीं । क्या होता ? ये शरीर ही तो नग्न होता………फिर क्या फ़र्क पड़ता है ………..ये शरीर तो एक दिन राख बनेगा …..या फेंक देंगें तो … Read more