!! एक अद्भुत काव्य – “प्रेम पत्तनम्” !!-(प्रेम नगर 30 – “और जहाँ असन्तोष ही सन्तोष है” ) : Niru Ashra
!! एक अद्भुत काव्य – “प्रेम पत्तनम्” !! ( प्रेम नगर 30 – “और जहाँ असन्तोष ही सन्तोष है” ) गतांक से आगे – यत्रासन्तोष एव सन्तोष : ।। अर्थ – जहाँ ( प्रेम नगर में ) असन्तोष ही सन्तोष है । *”हे रसिकों ! प्रेम की उल्टी रीत” इसे ही कहते हैं ….अधर्म ही … Read more